
ब्यूरो आगर मालवाः गोवर्धन कुम्भकार।
पहाड़ी क्षेत्र से घिरा हुआ गांव शिवगढ़ कुछ कह रहा है….. अपने आप में ही।
श्री राम मंदिर की बनावट और मंदिर की दीवारें ऐसा एहसास दिलाता है कि मानो या मंदिर बरसों पुराना है।
700 वर्ष से भी अधिक पुराना श्री राम मंदिर…..
मंदिर के अंदर शीला न जाने कौन सी भाषा में लिखा है…
गांव का नाम शिवगढ़ कचहरी की नीव खोदी गई उसमें से जटाधारी शिव की मूर्ति निकली उसी के आधार पर शिवगढ़ नाम रखा गया….।
इन्हीं देवस्थानों से सुप्रसिद्ध है शिवगढ़ गांव
श्री रामनवमी पर ग्राउंड जीरो से विशेष खबर जिला संवाददाता गोवर्धन कुम्भकार की खास रिपोर्ट्।
मध्य प्रदेश जिला आगर मालवाः के विकासखंड कानड़ क्षेत्र से महज 7 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत शिवगढ़ गांव है जो चारों तरफ से पहाड़ी क्षेत्र की गोद में बसा हुआ गांव शिवगढ़ है गांव मे कहीं सारी कहानियां और इतिहास से जुड़े तथ्य अपने आप में समाया हुआ शिवगढ़ गांव है जो आज तक किसे को भी नही पता इस गांव का नाम शिवगढ़ केसे पड़ा ओर किसने रखा है।
गांव की उत्तर की दिशा में स्थित राम मंदिर है जो अधिकांश पुराना है गांव के लोगों का कहना है बहुत वर्ष पुराना मंदिर है और गांव में हनुमान मंदिर व शिव मंदिर भी स्थित है हम आपको बताएंगे इस गांव का नाम शिवगढ़ कैसे पड़ा।
इस गांव में सभी संप्रदाय के लोग निवास करते हैं इस गांव में बहुत कम दूर से भी लोग इस शिवगढ़ में रहने के लिए आए हैं और अधिकांश इस गांव में किसान वर्ग के लोग एवं मजदूरी करने वाले इस गाँव मे रहते हैं कुछ ही व्यक्ति है जो इस गांव से बाहर गया है रहने के लिए बाकी तो इसी गांव में निवास करते हैं।
हम बात कर है शिवगढ़ जिसमें अपने आप में पुराने धरोहर के स्वरूप दिखाई देता है श्री राम मंदिर की बनावट और मंदिर की दीवारें ऐसा एहसास दिलाता है कि मानो या मंदिर बरसों पुराना है गांव वालों से इस मंदिर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया क्या मंदिर ब्रिटिश शासन काल से एवं अंग्रेज शासन काल से ही मंदिर ठीक वैसा का वैसा ही है और न जाने यह मंदिर इसके पहले कौन से शासन काल का है।
मंदिर की बनावट में सिर्फ दो ही चीजों का उपयोग किया गया है एक तो एट और चूना पत्थर इसके अलावा मंदिर में किसी धातु का प्रयोग नहीं किया गया है श्री राम मंदिर का जो सामने दरवाजा है मंदिर की बाहर की दीवारें हैं वह बहुत ऊंची है दीवार की ऊंचाई से यहां पता चल सकता है कि यहां बंदे कितना पुराना है और कितने वर्ष पुराना है।
श्रीराम मंदिर में जहां भगवान विराजित है उसके प्रवेश द्वार के पास एक पत्थर की शिला है जिस पर कुछ अजीब भाषा में क्या लिखा है यहां अब तक किसी को पता नहीं चला इस मंदिर और इस पत्थर पर लिखी गई भाषा का पता लगाने के लिए संभाग एवं जिले से रिसर्च करने आई टीम और कॉलेज छात्रा के दौरान इस गांव में कैंप भी लगा था जिन्होंने कैंप पर लगाया था उन छात्रों को भी नहीं पता चला इस भाषा के बारे में और शिला पत्थर पर आखिर कौन सी भाषा में लिखा गया है और क्या लिखा है यहां अब तक किसी को पता नहीं चल पाया है।
हमने तो यहां सोचा था कि इस गांव में जाएंगे तो हमें बुजुर्ग व्यक्ति या बुजुर्ग माताएं या फिर मंदिर पुजारी ही बता सकता है लेकिन उनका भी यही कहना है हम जब से इस गांव में निवास कर रहे हैं हमें भी इस पर क्या लिखा है यह हमें अभी तक पता नहीं चला।
इस गांव में मीडिया की टीम पहुंची तो सबसे पहले हम गांव का निरीक्षण किया उसके बाद हम श्री राम मंदिर पुजारी से मिले और हमने मंदिर के बारे में जानकारी जुटाना शुरू किया तो राजेंद्र दास पिता भगवान दास पुजारी ने बताया कि हमारे ही परिवार की तीन पिढ़िया इस मंदिर की सेवा चाकरी में लगी हुई है हमें इस मंदिर की सेवा चाकरी करते-करते पूरे 200 वर्ष हो गए हैं मंदिर के पास जो आपने समाधि अच्छी है वह इस मंदिर में सेवा देने वाले महंत जी की समाधिया है जो श्री राम की सेवा करते थे।
पुजारी जी ने आगे बताया कि मुझे जहां तक पता है जब से बैजनाथ मंदिर बना है उससे पहले का भी यहां मंदिर बना हुआ है मंदिर में पुराने धरोहर की ईट और चूना पत्थर और पट्टी एवं मंदिर का शिकारपुरा ईटों से बना हुआ है मंदिर पुजारी का कहना है आगे बहुत समय होने के कारण इस मंदिर की दुर्दशा एवं रंग रोगन निकल गया था तो हमने इस मंदिर मे सिर्फ इस मंदिर की रंग रोगन और सिढीयो पर सिर्फ कोटा स्टोन ही लगवाएं हैं बाकी तो सब जैसा मंदिर था वैसा का वैसा ही इस मंदिर का आकर है ओर मंदिर का स्वरूप वैसा ही है।
श्रपुजारीश्र जी को मंदिर में रहते रहते हैं 200 वर्ष हो चुके हैं और अब भी वर्तमान में वही रह रहे हैं नंदकिशोर पटेल बाग द्वारा बताया गया कि मंदिर 400 वर्ष से भी अधिक पुराना है मंदिर पुजारी एवं पटेल बा के द्वारा जो वर्ष बताए गए हैं यह वर्ष कुल 700 वर्ष हो रहे हैं जो यहां मंदिर 700 वर्ष से भी अधिक पुराना है।
श्रीमंदिर के बारे में हमने और जानकारी जुटाना चाहा तो हमें गांव के पटेल बा नंदकिशोर शर्मा जो पूर्व मंत्री है : -जो बात उन्होंने बताया कि यह मंदिर 400 वर्ष से भी बहुत पुराना है इस मंदिर में बड़े-बड़े संत रहते थे श्री राम मंदिर सामने का हिस्सा दो मंजिला था संत दो मंजिली पर रहते थे और उनकी जताए जमीन पर लटकती थी मंदिर के बाहर जो सम दिया है वहां बड़े महंत एवं संतों की है जिसमें से एक समाधि जिवित संत की है।
गांव के पटेल बा द्वारा आगे बताया गया कि इस गांव का नाम शिवगढ़ कैसे पड़ा उन्होंने विस्तार पूर्वक बताया उन्होंने कहा सबसे पहले ग्वालियर रियासत में था राजगढ़ के दरबार के लड़के कुंवर अभय सिंह ने ग्वालियर रियासत से इस गांव को राजगढ़ में मिलाया था राजगढ़ के दरबार द्वारा इस गांव को फतेह किया गया दरबार के बेटे लड़के का नाम अभय सिंह होने के कारण इस गांव का नाम अभयपुर रखा गया था फिर दरबार के द्वारा गांव में कचहरी की नीव डाली जब कचहरी की नीव को खोदी जा रही थी नीव खुदाई के दौरान 5 फीट अंदर से जटाधारी शिव शंकर भगवान की मूर्ति निकली भगवान शिव की मूर्ति निकालने के बाद राजा ने शिव के नाम से इस गांव का नाम शिवगढ़ रख दिया ।
तब से इस गांव को भगवान शिव के नाम से रखा गया ओर जब इस गांव का नाम शिवगढ़ पड़ा गया है।
मंदिर का दृश्य और गांव का फोटो नया अध्याय के सहयोगी धर्मेंद्र परिहार द्वारा ड्रोन कैमरे के माध्यम से लिया गया।
इस गांव को ओर सुदंर बनाती है गांव की नदियां जो उत्तर दिशा में बाणगंगा नदी बहती है और पश्चिम में दिशा में बंजारी नदी बहती है नदियों की पानी की बहती आवाज और गांव में स्थित श्री राम मंदिर शिव मंदिर और वीर बजरंगबली का मंदिर एवं चारों तरफ पहाड़ियों से घिरा हुआ यह गांव और भी सुंदर एवं अद्भुत दिखाई देता है बारिश के समय और भी अच्छा लगता है।
अति प्राचीन मंदिर जो देव डूंगरी पर विराजित जय देवनारायण मंदिर के नाम से जाना जाता है वह मंदिर भी एक अपने आप में कुछ अलग ही महिमा दर्शाता है।
पूर्व सरपंच लालसिंह कुम्भकार का कहना है : गांव के पटेल बा ने ओर पुजारी जी ने गांव के बारे ओर मंदिर के बारे बात वो सब ठीक लेकिन श्री राम मंदिर तो 700 वर्ष से भी अधिक पुराना है गांव के मंदिर में जो धार्मिक कार्यक्रम होता उसमे गांव के सभी वर्ग के लोग सहयोग करते वही हमारे गांव कि समिति प्रति वर्ष अनुसार गांव अतिप्राचीन मंदिर जय देवनारायण मंदिर देव डुंगरी प्राणंग में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जाता है समिति के अलावा गांव सहित आसपास के क्षेत्र के भी इस धार्मिक आयोजन मेें सहयोग करते हैं गांव सभी वर्ग के लोग मिल जुलकर रहते हैं मेरे संरपच कार्यकाल में गांव में बहुत सुख सुविधाओं के लिए काम किया है।
इसी गांव के युवा वर्ग का कहना है मंदिर का तो पता नहीं कितने वर्ष पुराना है लेकिन हमारे बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि मंदिर काफी वर्ष पुराना है।
गांव के युवा पवन कुम्भकार का कहना है : गांव में मंदिर धरोहर एवं प्रकृति को दर्शाता है हम बचपन में हम हमारे दोस्तों के साथ गांव की गलियों एवं मंदिर के आसपास खेलते रहते थे तो हमे मंदिर के पास का सुध्य वातावरण अच्छा लगता था मंदिर के पास हरियाली ओर प्रकृति को ओर भी खुबसूरत बनाती है।
गांव इन्हीं देवस्थानों व नदी तालाब जैसे झरनों से प्रकृति सौंदर्य में अपने आप में कुछ अलग ही रूप में दिखाई देता है।
जो भी बाहर से इस गांव में आता है वहां इस गांव की बड़ी प्रसन्नता करता है और उनके यहां मन करता है कि हम इस गांव की प्रकृति सौंदर्य का भरपूर आनंद ले और इस गांव को अच्छी तरह देखें और महसूस करें गांव के लोगों से अच्छी-अच्छी बातें करें और गांव के बारे में कुछ और जानकारी प्राप्त करते हैं बाहर के लोग।