आत्मकथ्य; उर्फ मैं एक अकिंचन कवि लिखूँगा ही क्या?
राजकुमार कुम्भज जवाहरमार्ग, इन्दौर …
कोई एहसान नहीं, फर्ज का तकाजा है, हैं आदमी तो, आदमी के काम आऐंगे।
राजेन्द्र रंजन गायकवाड (सेवा निवृत जेल अधीक्षक) …
दीपोत्सव के पाँच दिन, पाँच दीप, और पाँच संकल्प।
डॉ. दीपक गोस्वामी (नया अध्याय, उत्तराखण्ड) …
नर्सरी से पीएचडी तक राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था के पुनर्निर्माण की परिकल्पना।
डॉ. दिवाकर दुबे (नया अध्याय, उत्तराखण्ड) …


जब हमारे कुछ कथित एनालिस्ट कहते हैं कि अमरीका में तो तेल के दाम 77% तक बढ़ गए, या खाने की चीजें दोगुनी-तिगुनी महंगी हो गयी… तो फर्स्ट वर्ल्ड के 14s अपना कोलोनियल ज्ञान लेकर आ जाते हैं कि उधर की पर कैपिटा देखो, और अपनी।
कोई भी काम असंभव नहीं
विधिक साक्षरता/जागरूकता का आयोजन किया गया…..
म्हारी बोली म्हारी माटी म्हारो गांव –
आत्मकथ्य; उर्फ मैं एक अकिंचन कवि लिखूँगा ही क्या?
कोई एहसान नहीं, फर्ज का तकाजा है, हैं आदमी तो, आदमी के काम आऐंगे।
दीपोत्सव के पाँच दिन, पाँच दीप, और पाँच संकल्प।
नर्सरी से पीएचडी तक राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था के पुनर्निर्माण की परिकल्पना।
लोकतंत्र बचाओ अभियान
दीप से दीप जलाए हम





































































