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जय जोहार – देवारी तिहारलोगों को जिम्मेदार वित्तीय व्यवहार अपनाने, वित्तीय निर्णय लेने में लोगों को सक्षम बनाने महिलाओं को आर्थिक रुप से सशक्त बनाने के लिए साहेबगंज में नुक्कड़ नाटक।पैलाग फाउंडेशन के तत्वावधान में प्राथमिक विद्यालय बाल्टा में स्कूल बच्चों को स्कूल बैग एवं जूते वितरित।विधिक साक्षरता/जागरूकता का आयोजन किया गया…..   हाशिये के शब्द (पुस्तक चर्चा)मैं सच बताऊँ तो कश्मीरी पंडितों बल्कि हिंदुओं को ही समझ नहीं पाया हूँ…जो हिन्दू को लात मरता है, हिन्दू उसे ही सम्मान देता है… जो हिन्दू को लतियाता है… हिन्दूजन उसके चरण चुम्बन को तैयार रहता है… अपना आत्मसम्मान तक गिरवी रख देता है…मुझसे क्या गलत हो गया? (लघुकथा)गांव रूपाखेड़ा के युवा भरत चोपड़ा ने लंदन से मास्टर डिग्री प्राप्त कर पटेलिया समाज और झाबुआ जिले का बढ़ाया मान।हिम्मत से जीत जानागजल

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जय जोहार – देवारी तिहार

    अनुराग बघेल                                                बिजराकापा खुर्द, लोरमी, …

पैलाग फाउंडेशन के तत्वावधान में प्राथमिक विद्यालय बाल्टा में स्कूल बच्चों को स्कूल बैग एवं जूते वितरित।

  मीडिया प्रभारी अल्मोडा़ः दिनेश चन्द्र भट्ट                      (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)                        …

विधिक साक्षरता/जागरूकता का आयोजन किया गया…..   

  सौजन्यः बीएल भूरा                                                 चन्द्र शेखर आजाद नगर …

हाशिये के शब्द (पुस्तक चर्चा)

  अंजनी सक्सेना                     (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)                             …

मुझसे क्या गलत हो गया? (लघुकथा)

  सुश्री सरोज कंसारी                                             लेखिका एवं कवयित्री     …

हिम्मत से जीत जाना

  सुश्री सरोज कंसारी                                             लेखिका एवं कवयित्री     …

गजल

  राजेन्द्र रंजन गायकवाड                                           (सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)   …

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जय जोहार – देवारी तिहार
लोगों को जिम्मेदार वित्तीय व्यवहार अपनाने, वित्तीय निर्णय लेने में लोगों को सक्षम बनाने महिलाओं को आर्थिक रुप से सशक्त बनाने के लिए साहेबगंज में नुक्कड़ नाटक।
पैलाग फाउंडेशन के तत्वावधान में प्राथमिक विद्यालय बाल्टा में स्कूल बच्चों को स्कूल बैग एवं जूते वितरित।
विधिक साक्षरता/जागरूकता का आयोजन किया गया…..    
हाशिये के शब्द (पुस्तक चर्चा)
मैं सच बताऊँ तो कश्मीरी पंडितों बल्कि हिंदुओं को ही समझ नहीं पाया हूँ…जो हिन्दू को लात मरता है, हिन्दू उसे ही सम्मान देता है… जो हिन्दू को लतियाता है… हिन्दूजन उसके चरण चुम्बन को तैयार रहता है… अपना आत्मसम्मान तक गिरवी रख देता है…