डॉ0 रामबली मिश्र वाराणसी
सच्चा प्यार
पाया तोहफा प्यार का,तुम अनुपम अरमान.
दिल में बैठे दे रहे,सहज स्नेह का ज्ञान..
रहो सदा तुम पास में,गाओ मंगल गीत.
जिसका निर्मल हृदय है,वही परम प्रिय मीत..
बने हुए हो चाव से,जैसी तेरी चाह.
चलो पकड़ कर एक ही,सदा प्यार की राह..
बुला रहा तुझको सहज,दिल का मधुरिम गेह.
कदम बढ़ाओ चल उछल,देखो प्रिय का स्नेह..
साथी तो होता वही,जिसके दिल में प्यार.
प्यार करे जब हमसफर,लगे संग परिवार..
हर सच्चा इंसान में,होता सच्चा प्यार.
सच्चाई की राह ही,जगती का पतवार..
सच्चा प्यारा मित्र ही,बनता असली यार.
सच्चे दिल से प्यार का,लगे सदा दरबार..
सम्बोधन हो प्यार का,मधुर प्यार की बात.
सदा प्यार से ही कटे,जीवन के दिन- रात..
वक्त बड़ा अनमोल है,आयेगा वह पास.
सकल कामना पूर्ण जब, तब होगा अहसास..
निश्चित यह भावार्थ है,सिद्ध वक्त को देख.
आयेगा जब समय तो,पढ़ जाओगे लेख..
प्रियवर से संवाद का,हो मोहक अनुभूति.
बढ़ती जाये अनवरत,सत्य प्रीति की गीति..







