निक्की शर्मा (रश्मि) मुम्बई।
गणपति बप्पा मोरया
मुम्बईः श्री गणेश की पूजा से हर विध्न होता है दूर। भगवान गणेश बुद्धि, बल से काफी तेज तर्रार माने जाते हैं। हर शुभ कार्य की शुरुआत गणेश वंदना से की जाती है। गणेश जी की पूजा से हर दुख और बाधा दूर हो जाती है इसलिए इनकी पूजा सर्वोपरि मानी जाती है। हिंदू धर्म में हर शुभ कार्य को करने से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। “श्री गणेशाय नमः” का उच्चारण करने के बाद ही शुभ कार्य किए जाते हैं गणेश जी की पूजा हर शुभ कार्य के करने से पहले की जाती है। गणेश चतुर्थी में उनकी पूजा होती ही है साथ ही साथ हर एक कार्य में सबसे पहले उन्हें ही ध्यान किया जाता है। श्री गणेश की स्तुति की जाती है और उनकी आराधना की जाती है क्योंकि गणेश जी विघ्नहर्ता है।
हर बाधा को दूर करते हैं इसलिए इन्हें विध्नहर्ता कहा जाता है। हर एक कार्य की शुरुआत उन्हें याद करके ही किया जाता है। हर अनुष्ठान, कोई भी पूजा या कार्य से पहले आई हर विपदा, हर विध्न को दूर किया जाए इसलिए हर अनुष्ठान में पहले इन्हें याद किया जाता है। हर कार्य सफल हो इसलिए सर्वप्रथम गणेश पूजा की जाती है। भगवान गणेश की वंदना की जाती है गणेश जी की पूजा से हर दुख और बाधा दूर हो जाती है इसलिए इनकी पूजा सर्वोपरि मानी जाती है। खुशहाली आती है। श्रद्धा, भाव, आस्था से गणेश जी की पूजा करने से हर कार्य सफल होता है। श्री गणेश पूजन सर्वप्रथम क्यों किया जाता है इसके पीछे भी एक कहानी कही जाती है। एक बार देवताओं ने आपस में ही यह प्रश्न करने लगे की सबसे पहले किसकी पूजा होनी चाहिए और इस प्रश्न को लेकर दुविधा में थे। इस प्रश्न को लेकर ब्रह्मा जी के पास गए। ब्रह्मा जी ने कहा जो पृथ्वी की तीन परिक्रमा पूरे करके सर्वप्रथम आएगा वही सबसे पहले पूजा जाएगा। तब सारे देवता अपने अपने वाहन पर बैठकर पृथ्वी की परिक्रमा करने निकल पड़े तब भगवान गणेश ने माता पार्वती और पिता शिव की तीन परिक्रमा पूरी कर नतमस्तक खड़े हो गए।
बुद्धि और चतुरता से उन्होंने यह कार्य पूरा कर लिया था। माता-पिता से बढ़कर कोई नहीं है और परिक्रमा उन्होंने पूरी कर ली थी और उसे दिन से ही गणेश पूजन पहले होने का शुभारंभ हुआ।
गणेश जी को आशीर्वाद मिला कि हर शुभ कार्य के पहले इन्हीं की पूजन सबसे पहले की जाएगी। इनकी पूजन से हर बड़ा मुश्किल और विपदा दूर हो जाएगी और तभी से गणेश पूजन सबसे पहले होने की शुरुआत हो गई। गणेश पूजन से हर बाधा दूर हो जाती है बिना रुकावट विध्न दूर होकर हर कार्य पूर्ण होता है इसलिए गणेश जी की पूजा हर शुभ कार्य में सबसे पहले की जाती है।गणेश महोत्सव में आस्था की बही बयार मुम्बई में चारों ओर गुंज रहा गणपति बप्पा मोरया आस्था, भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक गणेश महोत्सव मुंबई के साथ पूरे महाराष्ट्र में धूमधाम से मनाया जा रहा है। अब यह पूरे देश में मनाया जाने लगा है। गणेश चतुर्थी का यह पर्व महाराष्ट्र के सबसे बड़े पर्व के रूप में मनाया जाता है। हिंदू, मुस्लिम सभी एक साथ यहां इस पर्व को मनाते नजर आएंगे। धर्म, जाति से ऊपर उठकर सभी एक साथ यह पर्व हर्ष आनंद से मनाते हैं। हमारी भारतीय संस्कृति हर पर्व त्यौहार को धर्म से अलग हटकर अपना प्यार का रंग दिखाती रही है। अनेकता में एकता का प्रतीक भारतीय संस्कृति हर त्यौहार, धर्म, जाति से ऊपर उठकर सबके पर्व में खुशियों में साथ देती है। गणेश चतुर्थी माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। काफी सालों से गणेश चतुर्थी सार्वजनिक पर्व के रूप में मनाया जाता रहा है। ब्रिटिश शासन के समय अत्याचारों के खिलाफ लोगों को एक जुट करने के ख्याल से यह पर्व सार्वजनिक रूप में मनाया जाने लगा था। बप्पा की भव्यता देखनी हो तो महाराष्ट्र के गणपति उत्सव का आनंद ले। हर जगह बप्पा विराजमान नजर आएगें। गणेशोत्सव का अदभुत नजारा आँखों में हमेशा के लिए बस जाता हैं।







