गौरव गायकवाड़
उपाध्यक्ष , आदर्श समाज स्वप्न साकार संस्था
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
प्रेम – पच्चीसा
परिचय – राजेन्द्र रंजन गायकवाड
राजेंद्र रंजन गायकवाड़ हिंदी साहित्य के एक ऐसे सृजनात्मक व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने अपनी लेखनी से जीवन के विभिन्न आयामों को छुआ है। सेवानिवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक के रूप में अपनी प्रशासनिक यात्रा को समेटते हुए, उन्होंने साहित्य को अपना माध्यम बनाया है, जहां उनकी रचनाएं न केवल भावनाओं की गहराई को उकेरती हैं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और मानवीय संबंधों की बारीकियां भी प्रस्तुत करती हैं। कविता, कहानी, आत्मकथा और अब उपन्यास के क्षेत्र में उनकी सक्रियता उन्हें एक बहुमुखी लेखक के रूप में स्थापित करती है। उनकी अब तक की रचनाओं में काव्य संग्रह जैसे खुला आकाश (2008), मुक्ताकाश (2015), मेरा आकाश (2021) परिवर्तक – जेल अधीक्षक की आत्म – कथा (2022 –द्वितीया संस्करण 2024) रागरंजन (लेख- माल 2024) और आकाश-पथ – काव्य – संग्रह (2025) शामिल हैं, जो आकाश की अनंतता की तरह जीवन की स्वतंत्रता, संघर्ष और आशाओं को चित्रित करते हैं। कहानी संग्रह अनकहे रिश्ते (2019) में वे उन अनकहे भावनाओं को उजागर करते हैं, जो दैनिक जीवन में छिपी रहती हैं। वहीं, आत्मकथात्मक रचनाएं परिवर्तक (2022) और राग रंजन उनके व्यक्तिगत अनुभवों को रागमय रूप देते हुए पाठकों को प्रेरित करती हैं। इन सभी माध्यमों से गुजरते हुए, गायकवाड़ अब उपन्यासकार के रूप में उभरे हैं, जहां उनकी नवीनतम कृति प्रेम- पच्चीसा , प्रेम की अनंत संभावनाओं को एक लंबी, बहु-आयामी कथा के माध्यम से प्रस्तुत करती है। यह उपन्यास न केवल उनकी साहित्यिक यात्रा का नया अध्याय है, बल्कि हिंदी साहित्य में प्रेम की परंपरागत कथाओं को आधुनिक संदर्भों से जोड़ने का प्रयास भी है।
उपन्यासकार के रूप में राजेंद्र रंजन गायकवाड़, एक नई साहित्यिक यात्रा में श्री रंजन जी , मूलतः काव्यात्मक और आत्मकथात्मक रही है, जहां उन्होंने जेल जीवन की कठोर वास्तविकताओं से लेकर व्यक्तिगत परिवर्तनों तक को अपनी कलम से उतारा है। परिवर्तक जैसी आत्मकथा में वे अपने प्रशासनिक जीवन के उतार-चढ़ावों को ‘परिवर्तन’ के सूत्र के माध्यम से बयान करते हैं, जो पाठकों को आत्म-चिंतन की प्रेरणा देती है। लेकिन उपन्यासकार के रूप में उनका प्रवेश प्रेम- पच्चीसा के साथ हुआ है, जो 2025 में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म प्रतिलिपि पर धारावाहिक रूप में सोशल मीडिया के साथ साथ देश के अनेक लोकप्रिय समाचार – पत्रों में प्रकाशित हुई है। यह कदम उनकी रचनात्मकता को विस्तार देता है, जहां वे छोटी-छोटी घटनाओं को एक लंबी कथा में पिरोते हुए सामाजिक मुद्दों को प्रेम के कैनवास पर उकेरते हैं।
उपन्यासकार के रूप में रंजन जी की विशेषता यह है कि वे अपनी पूर्व रचनाओं की भावुकता को बनाए रखते हुए, कथा को सामाजिक यथार्थ से जोड़ते हैं। उनकी पृष्ठभूमि—जेल सुधार और सामाजिक सेवा से जुड़ी—उनकी रचनाओं में परिलक्षित होती है, जहां पात्र न केवल प्रेम की तलाश करते हैं, बल्कि समाज की चुनौतियों से जूझते भी हैं। फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया पर वे स्वयं अपनी रचना के भाग साझा करते हैं, जिससे पाठक समुदाय के साथ सीधा संवाद स्थापित होता है। यह आधुनिक लेखन का एक उदाहरण है, जहां पारंपरिक साहित्य सोशल मीडिया की गति से जुड़ जाता है। राजेन्द्र रंजन गायकवाड़ जी का उपन्यासकार बनना हिंदी साहित्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि वे प्रेम को मात्र रोमांटिक नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाते हैं। उनकी यह यात्रा दर्शाती है कि साहित्य केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला माध्यम है।







