डॉ. हरि नाथ मिश्र, अयोध्या, उ.प्र.।
(नया अध्याय, देहरादून)
साथ निभाना
साथ निभाना ही तो जग में,
जीवन का आधार रहे।
प्रेम-मंत्र का जाप करें तो,
सदा सुखी संसार रहे।।
शक्ति एकता में रहती है,
जब हाथों में हाथ रहे।
पथ भी कठिन सरल हो जाता,
यदि साथी का साथ रहे।
एक हाथ को कर-ध्वनि ख़ातिर,
दूजे की दरकार रहे।।
साथ निभाना……….।।
बादल जल की वर्षा करता,
जब रवि साथ निभाता है।
नीर-कीच का साथ सदा ही,
पंकज-पुष्प खिलाता है।।
संगम पावन बन जाता जब,
नदी युगल जल-धार रहे।।
साथ निभाना…………।।
सूरज-चाँद-सितारे नभ से,
भू-मंडल उजियार करें।
जीव-जंतु का साथ निभाकर,
सतत कलुष-अँधियार हरें।
मौसम की अनुकूल दशा से,
जग में अन्न अपार रहे।।
साथ निभाना………..।।
निज समाज-रक्षार्थ सदा ही,
साथ निभाते पशु-पंछी।
पावन ऐसी सोच रहे यदि,
होगी बात बहुत अच्छी।
मात्र सोच ऐसी हितकर से,
मुदित मनुज-परिवार रहे।।
साथ निभाना ही तो जग में,
जीवन का आधार रहे।।







