राजेंद्र रंजन गायकवाड़
(सेवा निवृत केन्द्रीय जेल अधीक्षक)
छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, देहरादून)
किसी को, समझा नहीं सकते
सच्ची बातें, बता नहीं सकते
वो आँखों में, राज छुपाए बैठे हैं,
उनकी हक़ीक़त, दबा नहीं सकते ।
ज़ख़्म हमारे हैं, दर्द भी हमारा है,
राजे- दिल कभी, मिटा नहीं सकते।
वो जो मुस्कान में, काँटे सजाते हैं,
चेहरे पे उनके भाव, पढ़ा नहीं सकते।
इश्क़ की राहें हैं, या जुदाई के रास्ते,
इन राहों पे चलकर शरमा नहीं सकते।







