मानव जीवन बड़े सौभाग्य से मिलता है

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निक्की शर्मा रश्मि, मुम्बई

          (नया अध्याय, देहरादून)

 

 

मानव जीवन बड़े सौभाग्य से मिलता है

सनातन धर्म में भक्ति प्रेम और समर्पण है

एक लोटा जल सभी समस्याओं का हल

 

 

 

 

परिश्रम, पारदर्शिता, प्रेम और पवित्रता सफल जीवन के चार स्तंभ है। किसी को मन में बसाना हो तो मन बड़ा कीजिए किसी के मन में बसना है तो स्वयं छोटे हो जाइए। जैसे हर प्रश्न का उत्तर जरूर होता है उसी तरह हर समस्या का हल जरूर होता है।जब सब साथ छोड़ दे तो महादेव का साथ ही सबसे बड़ा सहारा है। जीवन में आनंद प्राप्त करना है तो कर्जा, क्लेश, और कलंक इन तीन चीजों से बचें।

 

प्रदीप मिश्रा जी को आज कथा वाचक के रूप में जाना जाता है। उनकी धार्मिक यात्रा की शुरुआत बचपन से धर्म के प्रति रुचि होने की वजह से हुई और आज उन्हें सीहोर वाले बाबा के रूप में लोकप्रियता मिली है।शिव महापुराण कथा में भगवान शिव की लीलाओं और महिमा का वर्णन सुनने को मिलता है। भगवान शिव की महत्ता,पूजन की विधि और नियम को जानने और समझने को मिलता है। शिव चर्चा एक आध्यात्मिक प्रवचन है जिसमें हम शिव पुराण की कहानी को सुन सनते हैं। मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। भगवान शिव की लीलाओं, भक्तों की कथाएं और समस्याओं के साथ समाधान सुनने को मिलता है। शिव चर्चा श्रोताओं और भक्तों के मन में नकारात्मक विचार को दूर कर उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ता है। शिव चर्चा का उद्देश्य धार्मिक ज्ञान देने के साथ-साथ नैतिक व आध्यात्मिक विकास करना है। शिव चर्चा नकारात्मक सोच को कहीं दूर ले जाकर मन को शांति देती है और ज्ञान में वृद्धि होती है साथ ही मन शांत होता है। लोभ द्वेष, क्रोध, अहंकार तन से दूर होती है।

 

सनातन धर्म में सबसे पवित्र मंत्र ‘ऊँ’ है यह ब्रह्मांड की आदि ध्वनि है। गायत्री मंत्र को भी पवित्र और शक्तिशाली माना गया है। ‘ऊँ’ का प्रयोग किसी भी मंत्र से पहले किया जाता है क्योंकि परम वास्तविकता का सार है। ‘ॐ’ सनातन धर्म का सबसे प्रमुख और पवित्र चिन्ह है। स्वास्तिक चिन्ह शुभता, सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है। सनातन शाश्वत पुरातन या हमेशा बना रहने वाला जिसका ना कोई आदि है और ना कोई अंत है। यह धर्म दर्शाता है की सृष्टि के आरंभ से अनंत काल तक यह रहेगा। सनातन पुरातन हमेशा रहने वाला शाश्वत महत्व ही तो सनातन है। सत्य सनातन है, ईश्वर ही सत्य है। आत्मा सत्य है, मोक्ष सत्य है, सत्य के मार्ग को बताने वाला धर्म सनातन धर्म है। सनातन धर्म में ज्ञान कर्म और भक्ति जैसे विभिन्न मार्ग हैं। ईश्वर के प्रति प्रेम और समर्पण ही भक्ति है। भक्ति से आध्यात्मिक शांति और आनंद मिलता है। गणेश, शिव, विष्णु, शक्ति और सूर्य जिन्हें पंचदेव कहा जाता है इनकी पूजा हर शुभ कार्य से पहले किया जाता है। यह ईश्वर के विभिन्न रूप हैं सनातन धर्म की बात सभी करते हैं लेकिन उनके भी कुछ नियम है आईए जानते हैं उन पांच नियमों को। अहिंसा, सत्य, अस्तय ना करना, स्वच्छता और इंद्रिय संयम। सनातन धर्म में 16 संस्कार होते हैं। इसमें गर्भाधान संस्कार से लेकर अंत्येष्टि संस्कार तक शामिल है। सनातन धर्म में भक्ति ईश्वर के प्रति अटूट प्रेम, श्रद्धा और समर्पण है। सनातन धर्म के विभिन्न मार्ग में से एक भक्ति हैः सनातन धर्म के जीवन शैली का एक अहम हिस्सा ही भक्ति है। यह हर सनातनी भक्त को ईश्वर के करीब ले जाता है और आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का रास्ता बतलाता है। भक्ति नौ प्रकार के होते हैं श्रवण, कीर्तन स्मरण, सेवा करना, अर्चन, वंदन ,दास्य,सत्य और आत्म निवेदन।भक्ति शब्द का अर्थ गीता के अनुसार समर्पण है। ईश्वर के प्रति प्रेमपूर्ण समर्पण का मार्ग ही भक्ति है। सनातन धर्म में भक्ति प्रेम और समर्पण ही है।जीवन को वह शांत और आनंद से भरता है।

 

कहा जाता है शिव मंदिर में तीन बार ताली बजाई जाती है। यह धार्मिक परंपरा है। पहली ताली भगवान शिव को दूसरी ताली मनोकामना पूर्ति और तीसरी ताली क्षमा याचना के लिए बजाई जाती है, साथ ही ब्रह्मा, विष्णु महेश सभी देवताओं को प्रणाम किया जाता है। रावण और भगवान राम ने शिव पूजा के बाद तीन बार ताली बजाई थी इसलिए कहा जाता है ऐसा करना बहुत ही शुभ होता है।

 

प्रदीप मिश्रा जी की श्री शिव महापुराण कथा मुंबई ठाणे मिरा भाईंदर में चल रही है। लोगों का उत्साह बताता है कि वह कितने लोकप्रिय हैं ।उनकी एक-एक बातों को लोग अमल करते हैं… सुनते हैं और उनका कहना है उनका मन शांत रहता है उनका प्रेम है जो उन्हें यहां तक खींच लाया है। उन्हें सुनने दूर-दूर से लोग आते हैं और घंटों कतार में लगकर प्रदीप मिश्रा की कथाओं को सुनते हैं। धर्म के प्रति आस्था, विश्वास कल भी था.. आज भी है. और कल भी रहेगा। सनातन धर्म हमें मन को शांति, पवित्रता, प्रेम देता है।

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