संजय एम तराणेकर
(कवि, लेखक व समीक्षक)
इन्दौर, (मध्य प्रदेश)
(नया अध्याय, देहरादून)
नववर्ष के आगमन पर विशेष कविता
‘पंचांग की ओर लौटो’…!
यारों आ रहा है ‘कैलेंडर वाला’ नया साल,
हिंदू प्रतिकूल स्थितियों से घिरा यह हाल।
क्या पाक-क्या बांग्लादेश हुए हम शिकार,
अमानवीय अत्याचारों सह होते रहे प्रहार।
नहीं कोई विरोध व नहीं हमें कोई आपत्ति,
ये 78 दिन बाद भी मनाओ हमारी संपत्ति।
हम सभी के लिए बहुत ‘नाजुक’ हैं अवधि,
आस-पड़ोस-भाई-बन्धु निरंतर होवें प्रगति।
ना हो किसी पर भी किसी तरह का हमला,
सुख-चैन व संतोष पाकर हर कोई संभला।
कैलेंडर सह पंचांग समझने के संस्कार दो,
‘पंचांग की ओर लौटो’ इस पे भी ध्यान दो।
(संदर्भ-78 दिन में कैलेंडर से पंचांग की तरफ लौटिए)







