संवाददाता: दिनेश भट्ट
(नया अध्याय)
हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना

हिंदी सिनेमाः बात करते हैं हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार यानी राजेश खन्ना की उनका जन्म 29 दिसंबर 1942 को जन्मे राजेश खन्ना ने शून्य से शिखर तक का सफ़र तय किया और हिंदी सिनेमा को उसका पहला सुपरस्टार दिया। राजेश खन्ना न सिर्फ़ एक अभिनेता थे, बल्कि वे भारत के पहले सुपरस्टार थे – जिनके नाम से सिनेमा हॉल भर जाते थे और जिनकी एक झलक पाने के लिए लोग दीवानों की तरह उमड़ पड़ते थे।
फ़िल्म आख़री ख़त (1966) से उन्होंने अपने अभिनय की शुरुआत की, लेकिन आराधना (1969) ने जैसे उनकी किस्मत के सितारे बुलंद कर दिए। एक मासूम मुस्कान, बोलती आँखें और दिल को छू लेने वाला अभिनय-राजेश खन्ना हर दिल अज़ीज़ बन गए।
उन्होंने लगातार 15 सोलो हिट फ़िल्में देकर ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया, जो आज भी कोई छू नहीं सका। आनंद, कटी पतंग, अमर प्रेम, सफ़र, हाथी मेरे साथी और बावर्ची जैसी फ़िल्मों में उन्होंने साबित कर दिया कि अभिनय सिर्फ़ संवाद बोलना नहीं, बल्कि दिल से दिल तक पहुँचने की कला है। आनंद में उनका किरदार आज भी आँखें नम कर देता है-सच ही कहा गया है, कुछ किरदार अमर हो जाते हैं।
प्यार से उन्हें “काका” कहा जाता था। उनकी लोकप्रियता ऐसी थी कि फैंस ख़तों में खून से खत लिखते थे, और शोहरत उनके कदम चूमती थी। उन्होंने न केवल रोमांस की परिभाषा बदली, बल्कि सुपरस्टारडम का मतलब भी नए सिरे से गढ़ा।
18 जुलाई 2012 को वे भले ही इस दुनिया से रुख़्सत हो गए हों, लेकिन उनके गीत, उनकी अदाएँ और उनकी यादें आज भी जिंदा हैं। कहते हैं ना- “जो दिलों पर राज करे, वो कभी भुलाया नहीं जाता।” राजेश खन्ना एक नाम नहीं, एक दौर थे।









