Ankur Batham
UPSC aspirant
Orai, jalaun, UP
(नया अध्याय, देहरादून)
पर्यावरण के प्रति नागरिकों के दायित्व
ऐसे समय में जब पर्यावरण अपना दम तोड़ रहा हो, सरकारें, पूंजीपति और स्वयं कुछ जन साधारण पर्यावरण को तहस नहस करने में लगे हो तब ऐसे में हमारा नैतिक और संवैधानिक कर्तव्य है कि हम पर्यावरण के प्रति सजग हो और हम जिस स्तर पर भी हों चाहें छात्र हों या फिर कामकाजी, पर्यावरण के प्रति अपना योगदान सुनिश्चित करना चाहिए, निम्नतर स्तर पर भी हम कम से कम एक वृक्ष तो लगा ही सकतें हैं। और यदि पर्यावरण से प्रेम हो, उसमें जीवन दिखता हो तो यह पर्यावरणीय संवेदनशीलता की सर्वोत्तम स्थिति होगी।
दिल्ली सहित अन्य प्रदूषित शहर में, जहां हम ऋण के रूप में पर्यावरण से आक्सीजन ले रहें हैं और कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जित कर रहे हैं, ऐसे में हम कम से कम पर्यावरण के कर्ज को उतारने के रूप में ही सही, एक वृक्ष तो अवश्य लगा ही सकते हैं।
या फिर इस रूप में भी ऐसा कर सकते हैं कि हम मित्रों के साथ, अपनों के साथ बर्थडे, न्यू ईयर सहित तमाम तरह की पार्टी करते हैं और उन्हें फिजूल के उपहार देते है, उनके स्थान पर उपहार के रूप में एक पौधा दे सकते हैं जो अपने किसी भी प्रिय की लिए उत्तम उपहार होगा, क्योंकि इस वृक्ष से प्राप्त ऑक्सीजन, फल, फूल, छाया न केवल एक व्यक्ति को प्राप्त होगी बल्कि संपूर्ण समुदाय को लाभान्वित करेगी और भविष्य में आप कभी अपने लगाए इस वृक्ष से भेंट हो तो हो सकता तब उस स्थान पर आपका कोई दोस्त न रहे, कोई परिचित न रहे तब ऐसे में आपका वह जीवन दायिनी वृक्ष होगा जो दूसरों को स्वांस प्रदान कर रहा होगा।
हमारा एक वृक्ष लगाना केवल एक नगण्य पर्यावरणीय योगदान मात्र नहीं, बल्कि समुदायों में ऐसा दृष्टिकोण पर्यावरणीय संवर्धन में अभूतपूर्व सुधार ला सकता है।
सरकारें पर्यावरणीय संरक्षण के लिए कैसा काम रहीं हैं, इस बात के मूल्यांकन के अतिरिक्त भी पर्यावरणीय संरक्षण और संवर्द्धन हमारा भी व्यक्तिगत दायित्व है। भारत में पर्यावरण को मां की संज्ञा दी गई है और ऐसे में जबकि मां बीमार हो, तो हम उसे सिर्फ नर्स की देखभाल के सहारे तो नहीं छोड़ सकते न।







