डॉक्टर रामबली मिश्र, वाराणसी।
(नया अध्याय, देहरादून)
मीठी वाणी
मीठे वचन में सदा प्रेम धारा।
दिल से निकलता लुभाना सितारा।
प्यारा सलोना अमर प्यार बहता।
कोमल हृदय का सुहाना नजारा।
उर्मिल सवैया ने मन को निखारा।
सावन सबेरा बना आज न्यारा।
मस्ती सजी है बनी आज प्रियमय ।
मोहक अदा में सगुन का दुआरा।
संगीत सरवर मनोहर किनारा।
वातानुकूलित शहद मन कछारा।
सुषमा सजी है मधुर गीत गाती।
मोहक उसी को जहाँ प्रीति ज्वारा।
मोहित सकल जग सहज मस्त क्वारा।
हरि द्वार सम्मुख खड़ा ले अकारा।
भावुक मनुज की परम प्रिय जुबां है।
प्रेमांबुजा प्यार अमृत अपारा।







