सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री एवं लेखिका
नवापारा-राजिम, रायपुर (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, देहरादून)
”एक गहरा और सार्थक जीवन वह है जहाँ व्यक्ति ‘काश’ के शब्दों को त्याग कर ‘अभी’ व ‘यहीं’ के सत्य को स्वीकार करता है” — सुश्री सरोज कंसारी।
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मनुष्य का मन अक्सर दो अवास्तविक दुनियाओं में भटकता है—एक वह ‘अतीत’ जो बीत चुका है और दूसरा वह ‘भविष्य’ जो अभी आया नहीं। इन दोनों के बीच सबसे घातक शब्द है— ‘काश’। यह शब्द हमें एक ऐसी काल्पनिक दुनिया में ले जाता है जहाँ हम अपनी असफलताओं को सुधारने का भ्रम पालते हैं, जबकि वास्तविकता हमारे हाथों से रेत की तरह फिसल रही होती है। ‘काश’ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व से भागने का एक रास्ता है। जब हम कहते हैं कि “काश ऐसा होता,” तो हम अपनी वर्तमान शक्ति को नकार रहे होते हैं। एक गहरा जीवन वह है जो यह स्वीकार करता है कि जो बीत गया वह पत्थर की लकीर है और जो ‘अभी’ है, वही वह मिट्टी है जिससे भविष्य की मूर्ति गढ़ी जा सकती है। ‘अभी’ और ‘यहीं’ का सत्य: सार्थकता संभावनाओं में नहीं, सक्रियता में है। ‘अभी’ और ‘यहीं’ का सत्य ही एकमात्र धरातल है जहाँ हम निर्णय ले सकते हैं, प्रेम कर सकते हैं और सृजन कर सकते हैं। स्वतंत्रता का अर्थ केवल इच्छाओं की पूर्ति नहीं, बल्कि वर्तमान क्षण के प्रति पूर्ण जागरूकता और जवाबदेही है। हम अपनी स्वतंत्रता के लिए स्वयं जिम्मेदार हैं। परिस्थितियों को दोष देना या अतीत पर विलाप करना ऊर्जा का अपव्यय है। जब व्यक्ति ‘अभी’ के सत्य को स्वीकार कर लेता है—चाहे वह कितना ही कठिन क्यों न हो—तभी उसके भीतर उस ‘आत्म-सृजन’ की प्रक्रिया शुरू होती है जो उसे भीड़ से अलग एक व्यक्तित्व बनाती है…वास्तविक आत्म-सृजन की इस यात्रा में स्वयं को जीतना ही संसार की सबसे बड़ी उपलब्धि है। विपरीत परिस्थितियों में खुद को शांत रखना, अपनी गलतियों को पहचानना और उन्हें सुधारना, और हर रोज़ अपने विचारों को बेहतर बनाने की कोशिश करना ही वह मार्ग है जिससे आप अपने मन के मालिक बनते हैं। जब आप अपनी शांति को प्राथमिकता बनाते हैं, तो जीवन से तनाव और उलझनें अपने आप समाप्त होने लगती हैं। आप छोटी-छोटी बातों का बुरा मानना छोड़ देते हैं और दूसरों के व्यवहार से अप्रभावित रहते हैं। यही वह स्थिति है जहाँ जीवन सरल, तनावमुक्त और दिव्य बन जाता है। जिसने खुद पर नियंत्रण पा लिया, उसने जीवन जीने की कला सीख ली। याद रखें, दुनिया को बदलना कठिन है, लेकिन खुद को बदलना ही दुनिया को बदलने की पहली और सबसे प्रभावी सीढ़ी है। जीवन की गहराई पछतावे के अंधेरों में नहीं, बल्कि वर्तमान के उजाले में कर्म करने में है। जिस दिन हम ‘काश’ के बोझ को उतार फेंकते हैं और अपनी शांति का कमान स्वयं थामते हैं, उसी दिन हम स्वतंत्रता के खुले आकाश में अपनी वास्तविक उड़ान शुरू करते हैं.अंततः, जीवन कोई समस्या नहीं है जिसे सुलझाना है, बल्कि यह एक अनुभव है जिसे पूरी जिम्मेदारी के साथ जीना है। बहानों की ओट में छिपकर हम केवल अपने अस्तित्व को छोटा करते हैं। जिस क्षण हम यह स्वीकार कर लेते हैं कि “मैं ही अपने जीवन का रचयिता हूँ,” उसी क्षण हम बेड़ियों से मुक्त हो जाते हैं। अकेलेपन की गहराइयों में उतरकर अपने सत्य को पहचाने, बहानो की राख को झाड़कर कर्म की अग्नि प्रज्वलित करें, और एक ऐसे जीवन का सृजन करें जिसका अर्थ केवल आपने तय किया हो। आपकी स्वतंत्रता ही आपकी नियति है, इसे साहस के साथ स्वीकार करें।







