राजेंद्र रंजन गायकवाड़
(सेवा निवृत केन्द्रीय जेल अधीक्षक)
छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, देहरादून)
संस्मरण 29
बुढ़ापा देखकर रोया !
सभी जानते हैं कि वृद्धावस्था जीवन का एक सुनहरा अध्याय (Golden Phase) हो सकता है बशर्ते हम अपने नजरिए और जीवनशैली में थोड़ा बदलाव लाएं। सेवा निवृत्त होकर मैं साढ़े तीन साल में जो काम किया, आपसे शेयर कर रहा हूं। सबसे पहले शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखता हूंँ, स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है। हल्का व्यायाम रोज सुबह-शाम करता और टहलना, योग या प्राणायाम भी कर लेता हूं। इससे शरीर में ‘फील गुड’ हार्मोन बढ़ते हैं।
संतुलित आहार अर्थात हल्का और पौष्टिक भोजन लें। पर्याप्त पानी पिएं। नियमित चेकअप समय-समय पर डॉक्टर से सलाह लेते रहता हूंँ ताकि स्वास्थ्य को लेकर मन में कोई डर न रखें, अगले सप्ताह मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने वाला हूं, ताकि एक और किताब लिख सकूं। मेरा सदैव सामाजिक जुड़ाव रहता है। (Social Connection) अकेलापन उदासी का सबसे बड़ा कारण होता है।
अपने अच्छे दोस्तों से मिलना अच्छा लगता है, अपने हमउम्र दोस्तों के साथ पार्क या क्लब में समय बिताने हर शनिवार सपरिवार उनके घर जाता हूं। पिछले शनिवार सेवा निवृत्त डीएसपी श्री भारतीब्से मिलने गया था। इसके साथ साथ कुछ समय बच्चों और पोते-पोतियों के साथ अपनी कहानियाँ और अनुभव साझा करता हूं।
आधुनिक तकनीक का उपयोग सीख रहा हूं। दूर के मित्रों से वीडियो कॉल के जरिए उनसे जुड़े रहता। आज ही मैने भोपाल के दो मित्र और एक दुर्ग मित्र से फोन पर बात की।
मेरे मनपसंद शौक (Hobbies) को फिर से जागे हैं जैसे संगीत सुनना मेरी पहली पसंद है । विशेष कर गजल सुनना और लिखना। दरअसल, रिटायरमेंट का मतलब काम का अंत नहीं, बल्कि अपनी पसंद के कामों की शुरुआत है। बागवानी में रोज डांट खाकर खुश रहता हूं, मसलन जीवन संगिनी का कहना गमलों में रोज पानी न डाले ,पर मुझे लगता है कि पौधे प्यासे हैं,पत्ते मत मैले हैं, फूल अभी बच्चे हैं उनकी थोड़ा सा पानी पिला दूं, तो पिला देता हूं और नाश्ते में पेट भर भाषण सुन लेता हूं,, घर के गृह मंत्री के,, के कभी पेंटिंग या वह काम करें जो आप अपनी व्यस्त जिंदगी में नहीं कर पाए, उसे कर लेता फिर तीन दिन तक हाथों/ कपड़ों से पेंट छूटता नहीं।
सारे जीवन पढ़ना-लिखना चलता रहा,अच्छी किताबें पढ़ कर या अपने जीवन के अनुभवों को डायरी में लिखने की पुरानी आदत है। नई चीज़ें भी सीखत हैं, क्योंकि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। पुराना हारमोनियम बेटा ले गया ,तबला डिग्गी भर्तृहरि लोक गायकों को दान कर अब बांसुरी के राग छेड़कर पड़ोसी से गाली खाता हूं। ये एक तरह का बदला है,उनका कुत्ता बे बजाय रोता रहता है। सोच रहा हूं नया वाद्ययंत्र या कोई भाषा सीखने की कोशिश की जाए,, मसलन उर्दू और पाली ताकि सूफियाना मानसिक शांति और आध्यात्मिकता ध्यान लगा सकूं। मन को शांत रखने के लिए रोज 15-20 मिनट ध्यान लगा लेता हूं,, आना पाना और विपश्यना मुझे पसंद है।
सबकी हां, में हां मिला देता हूं, स्वीकार्यता (Acceptance): बदलती परिस्थितियों और उम्र के बदलावों को खुशी-खुशी स्वीकार कर सकूं। बचपन से सकारात्मक सोच पुरानी कड़वी यादों को भूलकर वर्तमान के छोटे-छोटे सुखों का आनंद ले रहा हूं। कभी दूसरों की मदद कर यथासंभव करता हूं । क्योंकि दूसरों के काम आने से जो संतुष्टि मिलती है, वह खुशी का सबसे बड़ा स्रोत होती है।
स्वयंसेवा (Volunteering): किसी एनजीओ आदर्श समाज स्वप्न संस्था का काम पूरी लगन से करता हूं।, पास के पुस्तकालय और कोचिंग क्लासें भी निशुल्क पढ़ा लेता हूं। काहे कि मुफ्त का ज्ञान बांटना मेरी पुरानी आदत है। गरीब बच्चों को पढ़ाना या स्काई गार्डन बॉयज होस्टल के युवाओं का मार्गदर्शन हर रविवार कर रहा हूं।
एक अनमोल विचार ये है कि “खुशी उम्र पर नहीं, आपके नजरिए पर निर्भर करती है। रिटायर काम से हों, जिंदगी से नहीं।” क्या आप चाहते हैं कि मैं आपके लिए तनाव कम करने कम कर सकता हूं तो अभी कॉल करें,, 9977898600







