अदिती कुशवाहा
बैकुंठपुर (कोरिया), छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, देहरादून)
मेरे वीर सिपाही
अये, क्या कहूँ मेरे वीर सिपाही!
आप शोर नहीं, सन्नाटा हो,
आप पहचान नहीं, भारत की परछाईं हो।
आप आर्मी नहीं, एक मिशन हो,
आप आवाज नहीं, एक संकल्प हो।
हे मेरे वीर जवानो!
तेरी आँखों में
न अंधेरी रात का खौफ,
न मौत का कोई डर।
तुमने तो खुशियों के दीये जलाए हैं
हर-हर घर।
तेरे सीने में जलती है
देशभक्ति की ज्वाला 🔥
तेरे तेज से हो जाते हैं
दुश्मन के इरादे काले।
भारत माँ की आन-बान-शान की खातिर
खाए हैं तुमने
हज़ारों गोलियाँ अपने सीने में।
आपके ये बलिदान अमर रहें
हर भारतीय के सीने में।
आज जो आजादी
हमारी साँसों में बसी है,
वो आपके रक्त में बहती
देशभक्ति की कहानी है।
हर भारतीय की
मुँह-जुबानी है—
अये भारत के वीर योद्धा,
तेरी वजह से ही
ये जिंदगानी है।
अये मेरे वीर क्रांतिकारी,
शहीद-ए-आजम,
देश के अमर जवान!
क्या-क्या कहूँ तुम्हें—
रणबांकुरे हो तुम,
तुम ही हो देश की
गौरव और शान।
सत्-सत् नमन
आपके शौर्य को,
आपके बलिदान को।
भारत माँ की पावन भूमि के
हर कण-कण में
आप अमर हो,
अमर हैं
और अमर रहेंगे।
हर भारतीय के दिल में—
जय हिन्द 🇮🇳
जय भारत 🇮🇳
जय भारतीय सेना 🇮🇳







