सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री/लेखिका/शिक्षिका
नवापारा-राजिम
रायपुर, (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, देहरादून)
आलेख
‘अंधेरा हैं तो रोशनी भी हैं, परंतु यह संसार नश्वर है। व्यक्ति को अपने अंतर्मन की पुकार भी सुननी चाहिए’
– सुश्री सरोज कंसारी
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यह दुनिया क्रूर और दयाहीन हो चुकी है, जो दिन के उजाले में ही इंसान को जीवित जला देने का सामर्थ्य रखती है। दिखावे के भ्रम से बेहतर सच की कड़वाहट है, क्योंकि यही सही राह दिखाती है…यह ज़िन्दगी के रंगमंच पर अपना बेस्ट परफॉर्मेंस दें। रंगमंच कलाकार के हौसलों को उड़ान प्रदान करता है। ईश्वर द्वारा सृजित इस संसार में हर मनुष्य एक बेशकीमती उपहार है। अपनी जगह हर मनुष्य का एक वजूद है, इसे संभालकर रखना अर्थात ज़िन्दगी को सुन्दर, सार्थक बनाना हम पर निर्भर है। मन की कल्पनाओं को उड़ान देकर सफलता का परचम हर व्यक्ति लहरा सकता है। हकीकत की जमीं पर अपने व्यक्तित्व को सुंदर आकार देकर लोगों की इस भीड़ में अपने मेहनत, लगन और शालीन व्यवहार से अलग पहचान बनाने में हम सफल होते हैं। हमें जन्म के रूप में सिर्फ हाड़-मांस से बना यह शरीर मिला है, जो प्रकृति के पंच तत्वों से मिला है। इसे तराशना, सहेजना और संवारकर एक अलग अंदाज में बेहतरीन ढंग से प्रस्तुत करने का काम हमें खुद करना होता है। जिन्दगी तो हर मनुष्य जी लेते हैं, इस संसार में जन्मे छोटे कीट से लेकर पशु-पक्षी सभी अपने लिए व्यवस्था कर लेते हैं। चाहे हंसकर या रोकर, कैसे भी हो, समय कट ही जाता है? लेकिन ध्यान से विचार करें! क्या हम इस विशाल जहान में सिर्फ खाने-पीने, सोने और अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए ही आए हैं? हमारा उद्देश्य क्या इतना निम्न है? सभी प्राणियों से अलग संरचना, सूझबूझ, कार्य करने की असीम शक्ति मिली है, वो इतनी सस्ती नहीं है। महान लक्ष्य की पूर्ति के लिए यह मानव जीवन मिला है। अपने मन की सुप्त अवस्था को जागृत करें तो हम पाएंगे कि आप हर वो कार्य कर सकते हैं जो आप करना चाहते हैं। अलग अंदाज में कुछ बेहतरीन प्रस्तुत कर अपने जीवन को मानवता के हित में समर्पित करना ही परम कर्तव्य है। हर आत्मा में ही परमात्मा का निवास है, जहां असंभव कुछ नहीं। जरूरत है अपनी रुचि, सपने और कल्पनाओं को एक नई उड़ान के लिए तैयार करना। जब दिल की गहराई से किसी कार्य को करने की ठान लेते हैं, उसी समय कार्य करने की असीम क्षमता हममें विकसित होने लगती है। हुनर सभी के पास होता है, उसे विशाल जन समुदाय के बीच कैसे परोसना है, उसके लिए साधना, त्याग व तपस्या की जरूरत पड़ती है। एक मार्गदर्शक और गुरु की जरूरत होती है, गुरु के आशीर्वाद से ही जीवन का कठिन मार्ग सहज और सरल बनता है। हर किसी में कला के बीज पलते हैं, लेकिन जो इसे अपनी मेहनत से सींचते हैं, वही पल्लवित व पुष्पित होते हैं। अपने अंदर की कला को सामने लाने के लिए रंगमंच की जरूरत पड़ती है, जहां हम अपनी भूमिका का बखूबी निर्वहन करने का प्रयास करते हैं। जितनी अधिक साधना व अभ्यास होती है, दर्शकों का प्यार, स्नेह, दुलार उतना ही ज्यादा होता है। रंगमंच वह स्थान होता है, जिस जगह पर हम अपने आप को प्रस्तुत करते हैं। लोगों के बीच भिनय करते हैं, जितने अच्छे ढंग से हम प्रस्तुत करेंगे, उतनी ज्यादा हमें तालियों की गड़गड़ाहट और प्रोत्साहन मिलेगा। बिना मेहनत के हम अपनी प्रतिभा को नहीं निखार सकते। एक कलाकार कला के माध्यम से जीवन जीने की शैली सीखता है। अभिन, के माध्यम से अनुभव मिलता है, जिसे वह हकीकत की दुनिया में लागू करता है। कला ही जीवन में अनुशासन लाती है। इन्सानों के झुंड में रहकर अलग पहचान बनाना इतना आसान नहीं, डूबना पड़ता है मुसीबतों की दरिया में। कला के रंगमंच में तो हम किसी और की जिंदगी को जीते हैं, जिसमें दर्शकों को रिझाने के लिए सबसे अलग और शानदार प्रस्तुति देना पड़ता है, तब जाकर तालियों की गड़गड़ाहट मिलती है। जिंदगी के रंगमंच में अपनी श्रेष्ठ प्रदर्शन जो करते हैं, वही असल में कलाकार होते हैं। अगर लोगों के दिलों में सदियों तक जीवित रहना है, मानव जीवन की सार्थकता पूर्ण करनी है, तो हमें मानवीय गुणों से युक्त जीवन के लिए समर्पण की राह में चलना ही होगा, जिसके निर्णायक हम स्वयं होंगे। इसलिए ज़िन्दगी के रंगमंच पर अपना बेस्ट परफॉर्मेंस दीजिए, आपकी हौसलों की उड़ान ही जीवन के धरातल में महान कलाकार बनाने में आपकी मददगार होगी। खुद को साबित करने के लिए किसी के सहारे की तलाश मत कीजिए। आपको जो अभिनय मिला है, उसके लिए जी तोड़ मेहनत कीजिए। चाहे पारिवारिक, सामाजिक, राजनैतिक, धार्मिक और व्यक्तिगत कोई भी क्षेत्र हो, अपना अंदाज औरों से अलग रखिए। भगवान भी उन्हीं के साथ होते हैं, जो बाह्य आडंबर से कोसो दूर एक अलग पहचान बनाने के लिए आतुर होते हैं…अपने मन-मस्तिष्क में सूर्य की तेज ऊर्जा, धरा की सहनशीलता, आसमान की ऊंचाई, सागर की गहराई, अग्नी सी ज्वाला और पर्वत की दृढ़ता भरिए। फिर देखिए! दुनिया की कोई भी नकारात्मक शक्ति आपको झुका नहीं सकती, रोक नहीं सकती, महान योद्धा बनने से। कला के रंगमंच में हम दूसरों की ज़िन्दगी का नकल करते हैं, जो अल्प समय के लिए होता है। अभिनय के बाद हम फिर से अपनी दिनचर्या में लौटते हैं और समय के साथ वह धूमिल भी हो जाता है। लेकिन आपको अपनी जिंदगी के रंग भूमि के स्थाई कलाकार बनना है, जो इतिहास के पन्नों पर दर्ज हो। जो आने वाली पीढ़ी के लिए अनुकरणीय हो और सांस्कृतिक विरासत के रूप में सहेजकर रखी जा सके। इसके लिए आपको स्वार्थ से ऊपर उठकर जनकल्याण, समाज और राष्ट्र के लिए बेहतर कार्य करना होगा। पाखंड की चकाचौंध से सत्य का संघर्ष बेहतर है। आत्म-मंथन कर अपनी कमियों को सुधार की कसौटी पर कसें। अपने व्यक्तित्व को मौलिकता के रंगों से सँवारें, ताकि आकर्षण स्वाभाविक हो, कृत्रिम नहीं। शब्दों को संवेदनाओं से सींचें ताकि वे सीधे हृदय तक पहुँचें। यदि जीवन के मंच पर आपका कर्म श्रेष्ठ है, तो परमानंद की प्राप्ति सुनिश्चित है।
सन्देश : कुछ पल रुककर देख लीजिए, इस अंधी दौड़ में… सब कुछ आपके पास, आपके भीतर ही है।
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