राजकुमार कुम्भज जवाहरमार्ग, इन्दौर,
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
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कोई छूट रहा है पीछे.
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भागता नहीं हूँ शिकायतों से
दंड-प्रहारों से भी कभी डरता नहीं हूँ मैं
कर्कशताओं से भी कर ही लेता हूँ किनारा
हारता हूँ तो असहमतियों के अस्वीकार से
जब मैं चलना चाहता हूँ सभी के साथ
तो चाहता हूँ ये भी कि साथ चलें सभी
और अगर कोई सकारण छूट रहा है पीछे
तो उसे भी साथ ले लूँ अपना हाथ देकर
कुछ आगे दौड़ रहे कुछ लोगों के साथ
जीवन की सबसे बड़ी दिक़्कत है यही
कि पीछे छूट रहे दबे-हारे लोगों को
अपने साथ लिये चलने के चक्कर में
कहीं हार नहीं जाएँ वे भी?
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