कुछ मिलता हैं तो कुछ खो जाता हैं, इंसान के धैर्य की हर वक्त परीक्षा होती हैं

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लेखिका/कवयित्री 

सुश्री सरोज कंसारी

नवापारा राजिम, छत्तीसगढ़

 

                 (नया अध्याय, देहरादून)

 

 

आलेख

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कुछ मिलता हैं तो कुछ खो जाता हैं, इंसान के धैर्य की हर वक्त परीक्षा होती हैं

                     सुश्री सरोज कंसारी 

 

अकेले रहने और लड़ने की ताकत भी रखिए।

 

जिंदगी में बहुत सी बातें होती हैं, एक इंसान के जीवन में सदैव उतार- चढाव होते रहते हैं। एक सी स्थिति नही होती बदलती रहती हैं। उम्र के हर मोड़ पर एक नई कहानी होती हैं। अलग किरदार होते हैं अलग पात्र होते हैं, जिसे हम अपने कर्मो लिखते हैं। सब कुछ अपने समय के अनुसार होता हैं। बचपन में जो लोग होते हैं, जिनसे हमें असीम प्रेम दुलार, स्नेह मिले होते हैं, वो सबसे अनमोल होते हैं। क्योंकि जीवन का सबसे हंसीन दौर होता हैं ये जहां हम मन से पवित्र होते हैं निस्वार्थ होते हैं मन में किसी प्रकार से बोझ नहीं होते सिर्फ प्रेम की भाषा समझते हैं। अपनो का साथ चाहते हैं और वो पल वो लम्हें जीवन के सफर में कहीं नहीं मिलते। मां की गोद, पिता का स्नेह उसके बाद तो तरस जाते हैं एक बूंद सच्चे प्यार और साथ के लिए।

जैसे- जैसे हम बड़े होते हैं जीवन की हर गतिविधि नियमो-परंपराओं का, बाह्य आडंबर रिश्ते- नाते, संगती का हमारे मन-मस्तिष्क पर प्रभाव पड़ता ही हैं कितने भी बचकर रहें। काम- क्रोध, वासना लोभ-मोह में पड़ ही जाते हैं, और मानसिकता बोझिल होती चली जाती हैं। जब तक बालपन होता हैं, हम निर्मल ह्वदय के होते हैं। भेदभाव जाति- धर्म और मजहब से दूर होते हैं, नफरत से नही भरे होते । यह माया जगत हैं, जिससे चाहकर भी पूर्णतः मुक्त नहीं रह सकतें। कहीं न कहीं भावुक होते हैं, कभी बहक जाते हैं, कभी भटक जाते हैं क्योंकि अपनो का साथ हर मोड़ पर नहीं मिलता।बस एक तड़प में जिंदगी गुजरती हैं पर सुकुन एक सपना होता हैं।

 

भले ही हम मर्यादा और संस्कार से बंधे होते हैं लेकिन जिंदगी में कुछ घटना, लोगों के व्यवहार ऐसे होते हैं की हम उत्तेजित हो जाते हैं। छल-कपट षड्यंत्र पाकर हम भी बदले के भाव से जाते हैं। मर्यादा में रहने और संस्कारी होने से भी किसी न किसी बात पर हतोत्साहित हो जाते हैं। झूठ और षडयंत्र पाकर। अगर संयमित रहें तो ठीक लेकिन जैसे ही बहक गए, कभी भटक गए खुद की भावनाओं को नियंत्रित न कर पाएं तो, जरा सी गलती से जीवन तबाह हो जाता हैं। चारित्रिक पतन होता हैं। यौवन वह समय होता हैं जब मौज- मस्ती ही अच्छी लगती हैं किसी के रोक- टोक को ज्यादा पसंद नहीं करते। मनोरंज और आधुनिक दिखने की चाह होती हैं। भविष्य के लिए बड़े- बड़े सपने होते हैं। जिसे पाने के लिए सफर करते ही रहते हैं। कहीं विश्राम नहीं मिलता इस बीच जो भी कर्म हम करते हैं उसके परीणाम मिलते हैं।

 

धीरे- धीरे करीबी रिश्ते- नाते मित्र भी छूटते चलें जाते हैं। हम सोचते रह जाते हैं। ये करेंगे, ऐसे, अब, तब करेंगे। लेकिन इस बीच बहुत कुछ घटित हो जाती हैं। जिंदगी एक घटना हैं जिसके विषय में कोई भविष्य वाणी नहीं होती। अज्ञान वश हम भोग- विलास में डूबे रहते हैं। जब तक भौतिक सुख में लिप्त रहते हैं। सब अच्छा लगता हैं, घमंड होता हैं धन- दौलत, शौहरत का नशा होता हैं। लेकिन जैसे ही शारिरिक मानसिक परेशानी आती हैं, कर्म की सजा मिलती हैं। वक्त के मार पड़ते हैं। तब अपनी लापरवाही पर पछतावा होता हैं। रोते- बिलखते, चीखते, सिसकते हैं।

 

याद रखिए ! जीवन में सिर्फ सहारा मत ढूंढिए। जब हम किसी के भरोसे ही रहते हैं, खुद से किसी समस्या का सामना नहीं कर पाते। लेकिन एक दिन जब कोई अपने बिछड़ जाते हैं या समय पर उनका साथ किसी कारण वश नहीं मिल पाता तो उस समय तन्हा और बेबस समझने लगते हैं। बिल्कुल हिम्मत नहीं जुटा पाते कुछ करने के लिए। इसलिए चाहे कितने भी सुखी संपन्न रिश्ते- नाते की भीड़ हो अकेले भी चलने रहने और सामना करने की आदत रखिए। जीवन हैं जिसके एक पल को भी व्यर्थ नहीं करना चाहिए। यह बेहद अनमोल हैं, जीते जी कभी कम नहीं होंगी समस्याएं।

 

आज हम देखते हैं हर मन में अशांति हैं, दुविधा हैं। सब कुछ होते हुए भी किसी न किसी बात को लेकर हम तनाव से ग्रसित होते हैं। आज हम नैतिकता को भूलते जा रहे, सद व्यवहार नहीं कर पाते। बोली- भाषा में मिठास नहीं, स्वार्थ से भरे हैं। जहां अपना लाभ होता हैं वहीं जुड़ते हैं अन्यथा किनारा कर लेते हैं।सात्विक जीवन को नहीं अपना पा रहे यहीं वजह हैं की सुकुन नहीं जीवन में। याद रखिए! प्रेम से ही जिंदगी में खूबसूरती आती हैं।उत्साह का संचार होता हैं हर पल को जीने की चाह होती हैं।इसलिए हर कदम पर हमें हर किसी से प्रेमपूर्वक व्यवहार करना चाहिए। प्रेम बांटना चाहिए इससे जीवनमें खुशियां आती हैं। प्रेम ही जीवन का सार लेकिन हम सिर्फ नफरत में गुजार देते हैं अधिकतर समय। कभी पाने के लिए तो कभी बटोरने के लिए। अक्सर हम अपने लिए सहज मार्ग चुनते हैं। जहां बिना प्रयास मेहनत और लगन के सब मिल जाएं यहीं वजह हैं की संघर्ष नही करने से जीवन के बहुत से ज़रूरी पहलू से अंजान रह जाते हैं। लेकिन जब हम कठिन पथ पर चलते चलते हैं, तब जीना सीखते हैं। तभी वास्तविकता का आभास होता हैं।

कुछ मिलता हैं कुछ खो जाता हैं, इंसान के धैर्य की हर वक्त परीक्षा होती हैं। मनुष्य का मन भावनाओं से भरा एक अथाह सागर हैं। हर पल एक द्वंद में रहते हैं, होनी- अनहोनी को सहते गिरते- संभलते हर कोई अपने अंतस में बहुत कुछ छुपाकर रखते हैं। हर चाहत तो पूरी नही होती लेकिन खुद को समझाकर रखतें हैं। वक्त की धारा में बहते हुए हर बाधाओं को पार कर की कोशिश करते हैं। हर इंसान को एक चाहत होती हैं कुछ करने की, बढ़ने की पर जीवन और मरण के बीच जो चक्र चलते हैं, उसका असर शारीरिक मानसिक रूप से होता हैं। समझौता, समन्वय, स्वीकार, भूल, सुधार, कमी, अभाव और प्रभाव को लेकर चलते हैं। मन ही मन कुछ सोचना, मुस्कुराना देना, फिर एक ही पल में हजारों सपने संजो लेना, कल्पनाओं में खो जाना और बहुत कुछ उम्मीद पाल लेना, एक ही पल में दुनिया की सैर कर लेना कितना अच्छा लगता हैं। किसी के जीवन में अभाव होता हैं तो कभी प्रभाव होता हैं।लेकिन अंतर्मन में कई बाते होती हैं, ख्वाहिश होती हैं। कभी अकेले बैठते हैं, तो किसी बात को याद डूब जाते हैं उसी में, लेकिन हकीकत की दुनिया अलग होती हैं, जो मिल जाए उसमे ही खुश रह पाना इतना सहज नहीं। बस एक दौड़ होती हैं ज्यादा पाने की, इसी चक्कर में हम जीवन का असली आनंद नही ले पाते। इसलिए छोड़िए बेवजह की चिंता हर किसी को साथ लेकर चलें और खुश रहना सीखिए।

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