सम्पादक रुद्रप्रयागः लक्ष्मण सिंह नेगी
(नया अध्याय)
मदमहेश्वर धाम यात्रा से पूर्व मार्ग सुगम बनाने की मांग, समिति ने सौंपा ज्ञापन।
ऊखीमठः द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर धाम के कपाट आगामी 21 मई को खुलने जा रहे हैं, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। इसी क्रम में पंच कारबारियान हक-हकूकधारी समिति गौण्डार ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियन्ता को ज्ञापन प्रेषित कर यात्रा व्यवस्थाओं को सुचारु बनाने की मांग उठाई है।
समिति के पदाधिकारियों ने अपने ज्ञापन में कहा कि मदमहेश्वर धाम की यात्रा हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है, लेकिन मार्गों की दयनीय स्थिति यात्रियों के लिए कठिनाई का कारण बनती है। उन्होंने विशेष रूप से निर्माणाधीन अकतोली–गौण्डार मोटर मार्ग को शीघ्र पूर्ण करने की मांग की, ताकि यात्रा मार्ग अधिक सुगम और सुरक्षित बन सके। इसके अतिरिक्त जोसरी धार से देवी मंदिर तक जाने वाले पैदल मार्ग की खराब स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की गई। समिति का कहना है कि यह मार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है, जिससे यात्रियों को फिसलन, संकरी पगडंडियों और जोखिम भरे रास्तों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यात्रा शुरू होने से पहले इस मार्ग का चौड़ीकरण व मरम्मत अत्यंत आवश्यक है। समिति अध्यक्ष शिवानन्द पंवार का कहा कि यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों की आजीविका भी इस मार्ग पर निर्भर रहती है। यदि मार्ग सुगम होगा तो न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि क्षेत्रीय व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा । समिति सचिव वीरेन्द्र पंवार ने लोक निर्माण विभाग से अपील की है कि मदमहेश्वर धाम की यात्रा को ध्यान में रखते हुए सभी पैदल मार्गो व निर्माणाधीन मोटर मार्ग को समय पर दुरुस्त किया जाए, जिससे श्रद्धालु सुरक्षित और सुगम यात्रा का अनुभव कर सकें।
प्रधान अनूप पंवार ने बताया कि अकतोली – गौण्डार मोटर मार्ग का निर्माण कार्य जारी रहने से प्राचीन पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त हो चुका है इसलिए जोसरी धार से देवी मंदिर तक पैदल मार्ग का ट्रीटमेंट अनिवार्य है जिससे भगवान मद्महेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली को ऊखीमठ से धाम ले जाने में किसी प्रकार की परेशानियों का सामना ना करना पड़े। देख-रेख समिति सरपंच जसपाल सिंह पंवार का कहना है कि निर्माणाधीन मोटर मार्ग व पैदल मार्गों का सफर सुगम होने का लाभ तीर्थ यात्रियों के साथ स्थानीय ग्रामीणों को भी मिलेगा।







