प्रभारी सम्पादक जौनपुर यूपीः पंकज सीबी मिश्रा
(नया अध्याय)
तमिल और बंगाल चुनावों में अभिनय और अनुभव का मुकाबला :
वाराणसी : तमिलनाडु और केरल का भी चुनाव पश्चिम बंगाल चुनाव के साथ होना है और परिणाम भी मई माह में आपको इन राज्यों से देखने को मिलेगा । तमिल भाषी क्षेत्र में ब्राह्मण प्रत्याशी को ना उतारना भाजपा के लिए हानिकारक होने वाला है । तमिलनाडु में तीन अलग-अलग ध्रुव एक दूसरे के सामने हैं। एमके स्टालिन के नेतृत्व में द्रमुक गठबंधन या आईएनडीआईए गठबंधन, अन्नाद्रमुक के साथ भाजपा या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और फिल्म स्टार विजय की टीवीके। विजय ने भी चर्चों और ईसाइयों के बीच खूब चुनाव प्रचार किया है। ऐसा लग रहा है कि ईसाइयों का बहुत बड़ा वर्ग इस बार उनके साथ जा रहा है तो जितनी संख्या में ये जाएंगे वह सारा वोट द्रमुक का ही होगा। इसके अलावा भाजपा अन्नाद्रमुक के साथ दो अन्य पार्टियां भी गठबंधन में है। भाजपा ने बहुत कम सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन उसके उसका मूल लक्ष्य द्रमुक को सत्ता से हटाना है। चुनाव प्रचार इनका सबसे सघन और नीचे तक जा रहा है। द्रमुक के विरुद्ध सत्ता विरोधी रुझान है और तभी एक तिहाई विधायकों का स्टालिन ने टिकट काटा। दूसरे, उन्होंने चुनाव में महिलाओं के सामने शराबबंदी का वादा किया था लेकिन सत्ता में आने के बाद भूल गए। तीसरे, सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप है और उसके दो मंत्री जेल तक गए। एमके स्टालिन के पुत्र उदयनिधि स्टालिन जो की सनातन को पूरी तरह समाप्त करने और न जाने क्या-क्या बोल रहे थे वे मंदिर – मंदिर घूम रहे हैं। इससे पता चलता है कि द्रमुक खेमें में कितनी बेचैनी है। राहुल गांधी की पार्टी कांग्रेस द्रमुक के साथ गठबंधन में है। दोनों इंडिया गठबंधन में भी है। लेकिन स्टालिन के साथ राहुल गांधी की एक भी सभा नहीं हुई। स्टालिन के साथ किसने सभा की? तो अरविंद केजरीवाल और तेजस्वी यादव ने। केजरीवाल और तेजस्वी यादव वहां एक वोट द्रमुक गठबंधन को नहीं दिलवा सकते। दोनों अपने-अपने राज्यों में चुनाव हार चुके हैं और दोनों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। फिर इनको वहां बुलाया क्यों? विजय के बारे में प्रश्न उठाया जा रहा है कि वह किसका वोट काटेंगे? आरंभ में था कि वह दोनों तरफ का वोट काट रहे हैं। अब यह स्पष्ट हो रहा है कि दोनों तरफ का वोट काटते हुए भी वह द्रमुक का वोट ज्यादा काट रहे हैं। एमके स्टालिन को ईसाइयों का एकमुश्त वोट मिलता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं वहां सभाएं करके रोड शो किया। गृह मंत्री अमित शाह ने भी सभाएं की, रोड शो किया। इसके अलावा योगी आदित्यनाथ जी वहां गए। साथ ही दक्षिण भारत के नेता तो गए ही देश के दूसरे क्षेत्र के नेता भी वहां प्रचार कर रहे हैं। भाजपा ने बहुत कम सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन उसके उसका मूल लक्ष्य द्रमुक को सत्ता से हटाना है। गठबंधन के बीच बिल्कुल एकता है। पहले लग रहा था कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन या एनडीए शायद बहुत कुछ नहीं कर पाए और द्रमुक आसानी से तीसरी बार सत्ता में आ जाएगा। आज की स्थिति में यह कहना मुश्किल है। भाजपा अन्नाद्रमुक गठबंधन ने द्रमुक को जबर्दस्त चुनौती देने का मास्टर प्लान तैयार किया है। अन्नाद्रमुक के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं है। किंतु अभी भी जमीन पर प्रखंड से लेकर तहसील और जिलों तक में उसके संगठन है। अन्नाद्रमुक के नेता निचले स्तर पर खूब प्रचार कर रहे हैं। पासा अब किधर भी पलट सकता है। भाजपा अब अन्नाद्रमुक के साथ भी सत्ता में आ जाए तो आश्चर्य नहीं होगा।







