सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री / लेखिका / शिक्षिका
अध्यक्ष, दुर्गा शक्ति समिति
गोबरा नवापारा – राजिम, रायपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, देहरादून)
‘पलकों के मोती’ (कविता)
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आँखों में नमी बन रहते हैं आँसू,
दिल के जज़्बात बयां करते हैं आँसू।
हर रंग में घुल जाते, खुशी-गम की
दास्तां सुनाते हैं आँसू।
दर्द हद से बढ़े तो छलक जाते हैं,
अनवरत बहते, कभी रुदन, कभी चुभन
बन आँखों में ठहर जाते हैं आँसू।
ख्वाहिशें अधूरी हों तो उमड़ते हैं,
एहसासों में पिघलते हैं आँसू।
यादों में सिसकते, आँखों में
उफान बन रहते हैं आँसू।
पूरे वेग से बरसें तो मन हल्का करें,
जख्मों पर मरहम बन सहलाएं आँसू।
अपनो का साथ पाकर थम जाएं आँसू।
मिलने-बिछड़ने पर करवटें बदलें,
गम में सूखें, बरसात में भिगोएं आँसू।
हर लम्हा साथ रहें, तन्हा न करें आँसू।
मजाक न उड़ाना किसी की मजबूरी का,
अच्छे-बुरे दिन सबको दिखाएं आँसू।
अमीर-गरीब का भेद नहीं,
किसी के मोहताज नहीं आँसू।
वजह न बनो किसी के रोने की,
बहुत तड़पाते हैं आँसू।
चेहरे की शिकन पढ़ लो समय रहते,
वरना धार बन उभर आएँगे आँसू।






