डॉ0 हरि नाथ मिश्र
पूर्व विभागाध्यक्ष-अँगरेजी,
का0 सु0 साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय,
अयोध्या, (उ0प्र0)
(नया अध्याय, देहरादून)
सावित्री-वट (दोहे)
पूजनीय वट-वृक्ष है, शीतल इसकी छाँव।
शुद्ध वायु का स्रोत यह, परम रुचिर खग-ठाँव।।
वट-पूजा फलदायिनी, करे भक्त – कल्याण।
सावित्री यमराज से, लिया बचा पति-प्राण।।
उस बस्ती-जेवार की, यह पूरी पहचान।
जहाँ खड़ा यह वृक्ष है, बनकर उसकी शान।।
दूर-दूर से आ पथिक, करें यहाँ आराम।
तन-मन को शीतल करे, नित-नित इसे प्रणाम।।
सदियों तक सेवा करे, बूढ़ा बरगद पेड़।
औषधीय यह वृक्ष है, इसको कभी न छेड़।।
देव तुल्य वट-वृक्ष का, रखना है अब ध्यान।
नया वृक्ष रोपण करें, तब होगा सम्मान।।
जागरूक अब हो सभी, रोकें वृक्ष-कटान।
जीवन में वट-वृक्ष का, है अद्भुत अवदान।।
आओ मिलकर सब करें, बरगद-रोपण-काम।
पीपल-बरगद-नीम से, बने धरा सुख-धाम।।






