सम्पादक रुद्रप्रयागः लक्ष्मण सिंह नेगी
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
सिद्धपीठ कालीमठ में उमड़ा रहा आस्था का सैलाब।
दस कुन्तल फूलों से सजा मां का दरबार।
भगवती काली के तीनों स्वरूपों की पूजा-अर्चना
कर श्रद्धालु मांग रहे मनौती।
शारदीय नवरात्र में भक्तिमय हुआ कालीमठ सिद्धपीठ।
ऊखीमठः सिद्धपीठ कालीमठ में शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। भगवती काली के दिव्य दरबार में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही निरंतर बनी हुई है। भक्त मां भगवती के महा काली, महा लक्ष्मी, महा सरस्वती तीनों स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि, आरोग्यता और परिवार की खुशहाली की मनौती मांग रहे हैं। नवरात्र को लेकर मंदिर परिसर को दस कुन्तल फूलों से भव्य रूप में सजाया गया है। पुष्पों से सजे मां के दरबार की दिव्यता श्रद्धालुओं को भावविभोर कर रही है।
शारदीय नवरात्र के साथ ही कालीमठ धाम में धार्मिक अनुष्ठानों और देवी आराधना का विशेष महत्व दिखाई दे रहा है। प्रातःकाल से ही श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर मां के दर्शन कर रहे हैं। मंदिर समिति, विद्वान आचार्यों व भक्तों की ओर से मुख्य मंदिर सहित सहायक मंदिरों को आकर्षक रूप देने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। धूप-दीप, मंत्रोच्चार और देवी स्तुति के बीच संपूर्ण क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर है। दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंच रहे श्रद्धालु मां के चरणों में शीश नवाकर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मांग रहे हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिद्धपीठ कालीमठ भगवती आराधना के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। यहां नवरात्र के दिनों में मां की उपासना, अनुष्ठान और दर्शन का विशेष पुण्यफल माना जाता है। श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के चलते धाम में नवरात्र के दौरान विशेष रौनक बनी हुई है। दस कुन्तल फूलों से सजे दरबार ने मंदिर की आध्यात्मिक आभा को और अधिक भव्य बना दिया है।
वेदपाठी रमेश चंद्र भट्ट के अनुसार, नवरात्र शक्ति की उपासना का महापर्व है। इन नौ दिनों में मां भगवती के विभिन्न स्वरूपों की आराधना कर श्रद्धालु आत्मिक शुद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और लोकमंगल की कामना करते हैं। देवी उपासना भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति, साहस और धर्म की स्थापना का प्रतीक है। पण्डित दिनेश चंद्र गौड़ का मानना है कि सच्ची श्रद्धा, संयम और सद्कर्म के साथ की गई भगवती की आराधना मनुष्य को आत्मबल प्रदान करती है तथा समाज में सद्भाव और कल्याण की भावना को सुदृढ़ करती है।
नवरात्र के पावन अवसर पर मंदिर समिति द्वारा मुख्य मंदिर के साथ सहायक मंदिरों की साज-सज्जा और धार्मिक व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही के बीच मां के दर्शन को पहुंच रहे भक्तों में विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है। आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का संगम बना सिद्धपीठ कालीमठ इन दिनों देवी भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।


भगवती काली के प्रति अटूट श्रद्धा और पुष्पों से सजे दिव्य दरबार के बीच कालीमठ धाम में नवरात्र का पर्व श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया जा रहा है।






