सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री/लेखिका/शिक्षिका
नवापारा/राजिम
रायपुर, (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
लेख:
“हर दिन एक नया युद्ध है और तुम योद्धा हो”
: सुश्री सरोज कंसारी
जीवन हर पल शांत, सरल और सहज मार्ग नहीं। जीवन एक अविराम युद्ध है, जहाँ न जाने कितने ही युद्ध होते हैं, हर पल होते हैं सांसारिक जीवन में। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में युद्ध की स्थिति निर्मित होती है। सबसे बड़ा युद्ध हर वक्त होता है अंतर्मन में, जिससे हम हर पल घिरे होते हैं। भावनाओं की उथल-पुथल हर वक्त होती है, जिसे हम महसूस करते हैं। दुख और सुख के क्रम में, जिंदगी के उतार-चढ़ाव के बीच हम गिरते और संभलते हैं। अंतर्मन के युद्ध का अंत नहीं, हर पल वह एक नए रूप में होती है। जब हम दिल की गहराई में झाँकते हैं, तब देख पाते हैं कि वहाँ अतीत की चुभन, भविष्य के लिए सपने और वर्तमान में हम उलझे हुए हैं। हमें हर पल लड़ना होता है, जीवन की कठिनाइयों से। बिना लड़े अपने अस्तित्व, सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा नहीं कर सकते। बिना कहे नहीं समझ पाते लोग। आज सर्वत्र संवेदनाएं बिखर रही हैं, लोग एक दूसरे को दिल से नहीं दिमाग से स्पर्श करते हैं। मन ही मन लड़ो मत! कहो हर बात खुलकर। अपनी आवाज बुलंद करो, किसी के दबाव में मत रहो। निकलो इस सांसारिक जीवन के अनावश्यक जीवन की जंजीरों से। मन ही मन खुद से मत लड़ो, हर गलत का जवाब बनो। जहाँ अन्याय हो वहाँ चुप्पी मत साधो! तुम इस जीवन युद्ध के योद्धा हो। अच्छे कर्म से अपना भाग्य लिखो। किसी बात पर मन को छोटा मत करो, साहस में ही शक्ति का संचार होता है। जीवन एक निरंतर चलने वाला युद्धक्षेत्र है। युद्ध सिर्फ विनाशक हथियारों से नहीं लड़े जाते। जीवन युद्ध में सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक, मानसिक कई तरह के युद्धों का सामना हमें हर वक्त करना होता है। समय के साथ आने वाली विभिन्न परिस्थितियाँ हमें जीवन युद्ध के लिए तैयार करती हैं। हर मनुष्य अपनी जगह रहकर अपने जीवन युद्ध का सामना हर पल करता है। भोग-विलास, मद-माया, लोभ जीवन के लिए… सहने की आदत रखो, वहीं गलत को कहने से मत डरो। जीवन के इस युद्ध में कहीं से भी वार हो सकते हैं। छल-द्वेष, घृणा, क्रोध, षड्यंत्र, धोखे-बेईमानी का एक जाल है यह दुनिया, सचेत रहो! हर पग पर एक नया युद्ध है जिंदगी, मजबूत मन और एकाग्र ध्यान रखो। बस कहते मत रहो, करके दिखाओ। बंद करो चिढ़ना, जलना, नफरत करना। शांत सुखद जीवन के लिए मन में सद्भाव भरो। शिकायत करना छोड़ दो, बहते आँसू अब पोंछ लो। जीना है जग में तो मेहनत करो और त्याग, सेवा, समर्पण के लिए तैयार रहो। जीत की चाह है तो हार को भी स्वीकार करो। सबक जिंदगी की याद रखो। गलती कहाँ हुई ध्यान दो और खुद में सुधार करो। पाना है मंजिल तो एकांत से मत डरो, अपने अच्छे कर्म से लड़ने की शक्ति स्वयं अर्जित करो। मंजिल तक तो एकांत से मत डरो। विश्वास के साथ हर कदम आगे बढ़ाओ। खुद की हिम्मत बनो। न मिले कोई साथ और सहारा तो गम न करना, तुम ही हो विजेता इस जीवन युद्ध के, हमेशा याद रखना! भीड़ से डरने वाले पैरों तले रौंद दिए जाते हैं। डरकर भागने वाले हमेशा दहशत में रहते हैं और सामना करने वाले एक दिन विजेता बनते हैं। जीवन युद्ध अंत तक जारी रहेगा। परिणाम कुछ भी हो प्रयास हमेशा जारी रखना। जिम्मेदारियों से भागकर कायर मत बनिए। इस जीवन युद्ध के तुम ही हो योद्धा। हार मानकर खुद को कभी कमजोर साबित मत करना। हर सुबह एक नए युद्ध का जन्म होता है। बचपन से लेकर बुढ़ापे तक हम सांसारिक युद्ध के बीच अपने जीवन का निर्वहन करते हैं। जीवन के इस जंग में कभी कई तरह के जख्म मिलते हैं। मन में दुविधाएँ होती हैं, कभी मजबूर तो कहीं मजबूत होते हैं। दर्द से कभी रिश्ता गहरा होता है। आशा और निराशाओं के बीच जीवन की डोर बँधी होती है। जीवन युद्ध से हमें सीख मिलती है कि चाहे जिंदगी का सफर कैसा हो, हर एक पल का आनंद लीजिए। इस जीवन के विजेता बनने के लिए, कठिन हालातों से लड़ने का साहस कीजिए। धैर्य रखिए, मानसिक संतुलन कभी न खोना। अनुशासन के दायरे में रहकर हर कार्य कीजिए। दृढ़ इच्छा शक्ति से हर युद्ध जीतने का जज्बा रखिए। आलस्य का त्याग कर, कर्मशील बनिए। अपने जीवन के हर कार्य को योजना बद्ध ढंग से कीजिए। अपनी जुबान पर हमेशा काबू रखिए। कड़वे शब्दों के उपयोग से बचिए। झूठा वादा मत करो, बस जो सही है वही करो। हारने के बाद रुको मत, फिर से जीतने की तैयारी करते रहो।








