हरी राम यादव
सूबेदार मेजर (ऑनरेरी)
अयोध्या/लखनऊ
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w) 6395080071
वीरगति दिवस पर विशेष
लांस नायक ज्योतिष प्रकाश, शौर्य चक्र (मरणोपरांत)
भारतीय सेना की परंपरा हमेशा से ही सर्वोच्च बलिदान और अदम्य साहस की गवाह रही है। इसी गौरवशाली परंपरा को अपने रक्त से सींचने वाले उत्तर प्रदेश के जनपद देवरिया के वीर सपूत लांस नायक ज्योतिष प्रकाश (शौर्य चक्र, मरणोपरांत) की वीरता की कहानी आज भी हर देशवासी के सीने में देशभक्ति का जज्बा जगा देती है। ‘ऑपरेशन रक्षक’ के दौरान जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए उन्होंने जो पराक्रम दिखाया, उसके लिए उन्हें मरणोपरांत सेना के प्रतिष्ठित ‘शौर्य चक्र’ से सम्मानित किया गया।
26 अक्टूबर से 29 अक्टूबर 2006 के बीच जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के नगलबन गांव में आतंकियों के छिपे होने की खुफिया सूचना पर एक बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया गया। लांस नायक ज्योतिष प्रकाश इस बेहद संवेदनशील और खतरनाक ऑपरेशन में कंपनी कमांडर के ‘क्लोज ग्रुप’ का हिस्सा थे। तलाशी अभियान के दौरान, उनकी पैनी नजरों ने पत्थरों और घने नाले के पीछे भागते और छिपने की कोशिश करते दो खूंखार आतंकवादियों को भांप लिया। उन्होंने बिना वक्त गंवाए तुरंत मोर्चा संभाला और आतंकियों को चारों तरफ से घेर लिया। अपनी सटीक रणनीति और अचूक निशाने से उन्होंने एक आतंकवादी को वहीं ढेर कर दिया।
इलाके में घनी झाड़ियां और ऊंचे पत्थर होने के कारण अन्य आतंकियों की तलाश अभी जारी थी। इसी बीच, सर्चिंग के दौरान ज्योतिष प्रकाश का सामना महज दो से तीन मीटर की दूरी पर छिपे एक और आत्मघाती आतंकवादी से हुआ। दूरी इतनी कम थी कि पलक झपकते ही पूरे सर्च दल पर बड़ा खतरा मंडरा सकता था।
अपने साथियों की जान को सीधे खतरे में देख, ज्योतिष प्रकाश ने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की रत्ती भर भी परवाह नहीं की। उन्होंने अंधाधुंध गोलाबारी करते हुए सीधे आतंकवादी पर धावा बोल दिया। दोनों के बीच बेहद नजदीक की (Close Quarter Battle) भीषण लड़ाई हुई, जिसमें उन्होंने उस आतंकवादी को भी मार गिराया।
इस आमने-सामने की खूनी मुठभेड़ के दौरान लांस नायक ज्योतिष प्रकाश गंभीर रूप से घायल हो गए थे। शरीर से अत्यधिक खून बहने के बाद भी उनके हौसले डगमगाए नहीं। आतंकियों से आखिरी सांस तक लड़ते हुए और अपने साथियों की जान बचाते हुए, देवरिया का यह लाडला हमेशा के लिए माँ भारती की गोद में सो गया।
लांस नायक ज्योतिष प्रकाश ने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को दरकिनार कर जिस विशिष्ट बहादुरी और सर्वोच्च बलिदान का परिचय दिया, उसने भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपराओं को एक नया क्षितिज दिया। देश उनके इस सर्वोच्च बलिदान को कभी नहीं भूलेगा।
लांस नायक ज्योतिष प्रकाश का जन्म 01 जुलाई 1979 को देवरिया जिले के गनियारी गांव में श्रीमती गायत्री सिंह तथा डॉ. राम प्रसन्न सिंह के यहां हुआ था। बचपन से ही देश सेवा का जज्बा रखने वाले ज्योतिष प्रकाश ने अपनी स्कूली शिक्षा श्री हनुमान विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, बरौन से पूरी की। देश की रक्षा का संकल्प लेकर वे 05 जुलाई 1999 को भारतीय सेना की ‘ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट’ में भर्ती हुए। कड़े प्रशिक्षण के बाद उनकी पहली तैनाती 14 ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में हुई, बाद में उन्हे 39 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात किया गया। लांस नायक ज्योतिष प्रकाश के परिवार में उनके माता पिता दो बहने – माधुरी सिंह, संगीता सिंह, दो भाई – सत्य प्रकाश सिंह, तेज प्रकाश सिंह, वीरांगना श्रीमती सीमा सिंह तथा बेटी मासूमा ज्योतिष सिंह है।
लांसनायक ज्योतिष प्रकाश के गांव मे उनके परिवार द्वारा उनकी वीरता और बलिदान की यादों को संजोए रखने के लिए उनकी प्रतिमा लगायी गयी है तथा मोहरा समोगर मार्ग पर एक विशाल तोरण तोरण द्वार का निर्माण करवाया गया है।






