संजय एम तराणेकर
(कवि, लेखक व समीक्षक)
इन्दौर, (मध्यप्रदेश)
गजल – मेरी खुशी में आए हैं…!
मुझे खुशी है आप मेरी खुशी में आए हैं,
महका दिया चमन मेरी गली में आए हैं।
सोचा न था कभी खुशबू साथ में लाए हैं,
बहारों को क्यों घर पर छोड़कर आए हैं।
मोहब्बत हमसे भी है मेरे दर पर आए हैं,
लूट न जाना महफिल अरमान से पाए हैं।
जख्मों को कुरेद न जाना मरहम लगाए हैं,
मुश्किल से भरे ज़माना तोहमत लगाए हैं।
आज-कल दिन में काली घटा के साए हैं,
रोकों किसी का घर बर्बाद करने आए हैं।







