मुक्तक

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डॉ0 हरि नाथ मिश्र, अयोध्या (उ0प्र0)

 

 

                    मुक्तक

 

परम सफल सिंदूर का,है अद्भुत अभियान।

हतप्रभ दुश्मन हो गए,लखकर इसकी शान।।

जल-थल-नभ तीनों प्रखर,दैवी शक्ति-प्रतीक।

भारत माता का बढ़ा,सकल विश्व में मान।।

 

कुछ ही पल में ढह गए, नौ आतंकी द्वार।

एक शतक पापी मरे,गए छोड़ घर-बार।।

सेनानायक-सैन्य बल,सैनिक-भारत-लाल।

सब प्रणम्य-नमनीय हैं,करते बेड़ा पार।।

 

बेलगाम नेता हुए, करें बेतुकी बात।

गंदी दलगत-नीति से,करें कुठाराघात।।

उटपटांग वक्तव्य का,छोड़ विषैला बाण।

दुश्मन के रक्षार्थ ये, करते हैं उत्पात।।

 

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