काव्य रत्न डॉ0 रामबली मिश्र, वाराणसी।
शिव स्तोत्र
जटा विशाल भव्य भाल दिव्य सत्य शंकरम।
सदैव भक्त हेतु स्नेह भाव स्तुत्य शंकरम।
गले सदैव सर्प राज मारते अनिष्ट को।
सहर्ष संत रक्षणार्थ पालते सुशिष्ट को।
समस्त देह में विभूति पोतते प्रसन्न हो।
यही सदैव कामना रहे सुकाल अन्न हो।
त्रिशूल कष्ट काटता सदैव शंभु साथ हैं ।
नमः शिवाय जाप हो वही विशिष्ट नाथ हैं।
उमा समेत राम नाम बोलते सहर्ष शंभु ।
त्रिदेव लोक स्वामिनाथ हैं गणेश संग शंभु ।
मशान घाट दिव्य धाम शंभु नाथ वास है।
सदैव बैल नंदिनी समेत काशि वास है।







