डॉ0 हरि नाथ मिश्र, अयोध्या, (उ0प्र0)
वीरों की धरती भारत
वीरों की धरती भारत को,
शत-शत नमन हमारा है।
अपनी धरती,अपना अंबर-
जग में और न प्यारा है।।
प्यारी-प्यारी इसी भूमि ने,
जन्म दिया सुत वीरों को।
इनका करके सदा स्मरण,
नमन करें तस्वीरों को।
सदा ऋणी हम रहते इनके-
तन-मन-धन सब वारा है।।
अपनी धरती,अपना अंबर……….।।
राणा-गाँधी-बोस-शिवा जी,
शेखर-सुख,अशफ़ाक़-तिलक।
भगत पुत्र सब भारत माँ के,
हैं स्वतंत्रता के ये जनक।
कर बुलंद आवाज़ स्वतंत्रता-
की अरि को ललकारा है।।
अपनी धरती,अपना अंबर……….।।
कितने तो शूली पर चढ़ के,
माता की आशीष लिए।
इस माटी की तिलक लगाकर,
वीर मुदित निज शीष दिए।
पुत्रों के ही बलिदानों से-
सदा शत्रु भी हारा है।।
अपनी धरती, अपना अंबर……….।।
आज पुनः संकट है आया,
माँ की लाज बचानी है।
आओ मिलकर करें प्रतिज्ञा,
अरि को धूल चटानी है।
अपना तो इतिहास यही है-
हर दुश्मन को मारा है।।
वीरों की धरती भारत को,
शत-शत नमन हमारा है।
अपनी धरती, अपना अंबर-
जग में और न प्यारा है।।







