संजय एम तराणेकर
(कवि, लेखक व समीक्षक)
इन्दौर, (मध्य प्रदेश)
‘तिरंगा’ मेरे देश की पहचान…!
उन अमर ‘शहीदों’ का रखता हैं मान,
यहीं ‘तिरंगा’ हैं मेरे देश की पहचान।
कर्मभूमि व तपोभूमि का ‘गौरवगान’,
भारतवासियों का हैं मान-अभिमान।
जब भी ‘उन्मुक्त गगन’ में हैं लहराता,
सबके मन में देशभक्ति-भाव जगाता।
अनन्त अमर शहीदों को करते नमन,
देश आन में धरती से कर गए गमन।
वीर शहीदों की ‘शौर्य-गाथा’ गुणगान,
देश की खातीर न्योछावर किए प्राण।
विश्व में ‘अखंड भारत’ की ये पहचान,
आजादी अमृत महोत्सव हैं प्रतिमान।
गीता-रामायण, वेद ग्रंथ का देते ज्ञान,
सत्य सनातन पर हमें सदा अभिमान।
हरित-हरियाली केसरिया वीर प्रतीक,
श्वेत सादगी अशोक चक्र प्रगति गीत।
विकसित ‘आत्मनिर्भरता’ के रंग रंगा,
विश्व शांति का सदा ‘पैरोकार’ तिरंगा।







