डॉक्टर रामबली मिश्र, वाराणसी।
इच्छा शक्ति
होगी इच्छा शक्ति प्रबल जब।
कर्म हेतु प्रेरित हो मन तब।।
कोई रोक नहीं सकता है।
आगे कदम बढ़ा करता है।।
इच्छा का होना आवश्यक।
तभी वदन- मन दिखते धावक।।
मन की शक्ति स्वयं उत्प्रेरक।
सदा मानसिक ऊर्जा प्रेरक।।
इच्छा शक्ति नहीं है जिसमें।
प्रायः मृतक भाव है उसमें।।
नहीं कर्म के लायक वह है।
अति विचित्र नालायक वह है।।
जो इच्छा को सदा संवारे।
तोड़े वही व्योम के तारे।।
कुछ भी नहीं असम्भव उसको।
इच्छा शक्ति मिली है जिसको।







