संजय एम तराणेकर
(कवि, लेखक व समीक्षक)
इन्दौर, (मध्य प्रदेश)
दर्दनाक घटना न हो फिर…!
एक ‘बच्चा’ झाड़ियों में था पड़ा रहा,
चरवाहा अपने पशुओं को चरा रहा।
चरवाहा उस बच्चे को निहारता रहा,
दयालु ईश्वर देवदूत बन भेजता रहा।
माता-पिता निर्दयी एवं हैवान हो गए,
मुंह में भरे पत्थर व होठों पे लगे ग्लू!
रूह काँप गई हैं अब और क्या?कहूं,
15 दिन के नवजात का बहाया लहू।
भीलवाड़ा के मंडलगढ़ ‘बिजोलिया’,
बच गया बच्चा आँसूओं ने भिगोया।
‘अस्पताल’ में बच्चे की हालत स्थिर,
अब ऐसी दर्दनाक घटना न हो फिर।
(संदर्भ-15 दिन के नवजात से रूह कंपाने वाली हैवानियत)







