संजय एम तराणेकर
(कवि, लेखक व समीक्षक)
इन्दौर, (मध्य प्रदेश)
डांडिया की धुन में हैं ‘एकता’ का संदेश…!
आज भी डांडिया की धुन में हैं ‘एकता’ का संदेश,
गुजरात की सांस्कृतिक परंपरा फैली देश-विदेश।
ये नृत्य नहीं सामूहिकता, अनुशासन आनंदोत्सव,
ढोल-नगाड़ों के थाप एक लय में होता नृत्योत्सव।
वह दृश्य जब ‘सैकड़ों लोग’ एक साथ करते नृत्य,
भारतीय संस्कृति की समृद्धि एवं विविधता दृश्य।
डांडिया का महत्व ‘मनोरंजन’ तक नहीं है सीमित,
ये समाज को जोड़ने के माध्यम भी है अपरिमित।
भिन्न-भिन्न वर्गों,भाषाओं पृष्ठभूमियों से आते लोग,
एक ही ताल पे थिरकते भेद मिटाके करें सहयोग।
मजबूत होती एकता की भावना रहती सदभावना,
ऐसे आयोजनों का महत्व हैं प्रगति पथ पर बढ़ना।







