लेखिका/कवयित्री
सुश्री सरोज कंसारी, नवापारा राजिम
रायपुर (छ.ग.)
आलेख
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भावनाएं अदृश्य होती हैं जो दिखती नहीं पर महसूस होती हैं
किसी ने क्या खूब कहा हैं- भावनाओं का कहां द्वार होता हैं, जहां मन मिल जाएं वहीं हरिद्वार होता हैं। एक दूसरे के वास्ते त्याग-तपस्या और समर्पण ही जीवन की वास्तविक धरोहर हैं जब रिश्ते किसी स्वार्थ से नहीं आपस में सामंजस्य व वैचारिक एकता के सूत्र में बंधे होते हैं उसे तोड़ना और पल भर में बिखेर देना इतना आसान नहीं होता मन की गहराई से जो जुड़ाव होता हैं वो अटूट गठबन्धन होता हैं रूह से बंधे रिश्ते पवित्रता की पराकाष्ठा को छू लेते हैं जहां फिर कोई संदेह व वैमनस्य नहीं होता।
हर मन में माननीय भवनाएं होती हैं भावनाओं के समंदर की गहराई में अविरल बहती हैं रुकती नहीं कठोरता का आवरण ओढ़कर जो जीते हैं प्रेम की एक बूंद के लिए वे जीते जी तरस जाते हैं भावनाएं अदृश्य होती हैं जो प्रत्यक्ष दिखती नहीं पर अंतरात्मा में महसूस होती हैं जिसमें भावशून्य भावना का कोई मोल नहीं पवित्र भावनाएं ही मधुर संबंध स्थापित करते हैं जो मानव जीवन का अद्भुत श्रृंगार हैं जीवित होकर भी मृत के समान होते हैं वे जों किसी की चीख करुण कराह वेदना व तकलीफ़ देख पिघलते नहीं उनमें सहानुभूति के मरहम नहीं लगा पाते नफरत की जमीं पर शुद्ध भाव कभी पुष्पित नहीं होती स्नेह की जमीं पर अपनेपन की खाद से ही रिश्ते पनपते हैं दिल से जुड़े रिश्तों में अपनत्व की महक होती हैं भावनाओं की पोटली में दया करुणा ममता धैर्य सहयोग सहनशीलता सरलता सौम्यता सहजता और प्रेम समाहित होती हैं जो हमें मुश्किल की आंधी से लडने की क्षमता प्रदान करती हैं।
मानव मन में हर पल एक अनकही हलचल होती हैं जो सुकून की तलाश में भटकती रहतीं हैं जिसमें एक पल भी ठहराव नहीं होता मनुष्य के ह्रदय में एक पल में ही हजारों ख्वाहिश जन्म लेती हैं और उसी पल विपरित हालात पाकर दफन भी होती हैं लेकिन जो लगन विश्वास और प्रीत की डोर से बंधे होते हैं गम के अंधेरी रात में रात में भी मंजिल का पता ढूंढ ही लेते हैं जरुरत होती हैं एक जिद की पाने की चाह होना ही पर्याप्त नहीं होता उसमें डूबकर निकलने की हिम्मत भी होनी चाहिए। तमन्नाओं की अधूरी सी दस्ता यूं ही मुकम्मल नहीं होती तपती हैं तड़पती हैं कतरा- कतरा पिघलती हैं तब जाकर सुकुन के कुछ पल पाती हैं।
अगर मन में कोई जज़्बात कल्पना और चाहत न हो तो बोझिल नीरस बेबस और लाचार सी हो जाती हैं जिंदगी जीने के लिए एक वजह होना ज़रुरी हैं।उम्र के हर मोड़ पर कोई न कोई चाहत होती हैं जो जिंदगी को जीने के लिए प्रेरित करती हैं बिना लगाव के चुभती हैं जिंदगी इसलिए कोई न कोई मकसद ज़रुरी हैं विकल्प बहुत से हैं जीवन को आनंदित करने के बशर्ते आधुनिकता को हावी न होने दें ख़ुद पर आज हम तकनीकी युग में जी रहे हैं तो बेशक इसके साथ कदम से कदम मिलाकर चलें लेकिन खुद को मशीन न बनाएं सुबह से लेकर रात तक सिर्फ धन-दौलत पद-प्रतिष्ठा के लिए ही न भागे कुछ पल ठहरे और सोचे किसके लिए दिनभर भागदौड़ कर रहे हैं, आपके लिए महत्वपूर्ण क्या हैं जिनके लिए ये सब कर रहे हैं उनके तरफ कभी निहारे क्या वे खुश हैं उन्हें सिर्फ दौलत की भूख हैं या आपके साथ की प्रेम की और आपके कुछ फुर्सत के पल की जिसे वे आपके साथ बिताना चाहते हैं ? लेकिन आप इनमें से कुछ भी नहीं दें पाते सिर्फ भौतिक आडंबर युक्त जीवन देते हैं जो कुछ पल के लिए हैं।
आंतरिक खुशी तो स्नेह से मिलती हैं जिसके लिए आपके पास समय नहीं जरा सोचें जिंदगी तो अमानत हैं कब कौन कैसे किस हाल में इस संसार से विदा हो जाएं पता नहीं? इसलिए ज़रुरी हैं जी ले अपनो के साथ उन लम्हों को भी जो जरुरी हैं। जब अपने होते हैं तो लगता हैं सब तो हैं मेरे साथ पहले खूब धन-दौलत शोहरत बंगले गाड़ी और दुनिया की सारी खुशी खरीद लूं फिर चैन से जिंदगी गुजरेगी सबकी लेकिन तब तक देर हो जाती हैं वो अपने ही नहीं रहते आपके द्वारा इतनी मेहनत से अर्जित सुख–सुविधाओं के उपयोग के लिए कितना दुख होता हैं उस पल में वहीं समझ सकतें हैं जिन्होंने इस हकीकत से सामना किया हो।
जब परिस्थिति अनुकूल होती हैं और सब कुछ आपके पास होता हैं किसी बात की कमी नहीं होती उस समय आप महसूस नहीं कर पाते जों है वो कितने महत्त्वपूर्ण हैं हमारे लिए जब सब ठीक हो तब कहीं न कहीं अहम का भाव होता हैं कदर नहीं होती किसी की आपकी नजर में समय का एक एक पल गुजरता हैं और साथ में होश जोश उत्साह खुशी एहसास और ख्वाब सब कम होने लगता हैं हर कार्य की एक हद और वक्त होता हैं वक्त के बाद फिर से वहीं माहौल मिलना मुमकिन नहीं रिश्ते कहीं भी किसी से नहीं जुड़ते आत्मीय लगाव किसी पद पैसे या सुंदरता के मोहताज नहीं।
छल-कपट ईर्ष्या-द्वेष से भरे इस माहौल में आज किसी के प्रति सच्ची श्रद्धा लगाव और प्रेम होना कठिन काम हैं। किसी से मन मिलना उससे आत्मीय जुड़ाव होना सौभाग्य की बात हैं। रिश्ते जाती-धर्म मजहब देखकर नहीं बनते हृदय की गहराई को जो स्पर्श करें हजारों में कोई एक होते जाते हैं भावनाओं का मिलन सबसे पावन होता हैं जिंदगी के हर मोड़ पर संबंध एक नई प्रेरणा ऊर्जा और मार्गदर्शक बनकर रहते हैं कोई भी व्यक्ति जिंदगी के सफ़र में अकेले नहीं होते साथ होती हैं अपनो की यादें बातें और उनके सुखद एहसास लेकिन हम जो पास हैं उनकी कदर नहीं कर पाते अक्सर सांसारिक उलझनों की वज़ह से कभी-कभी उनकी उपेक्षा कर देते हैं वो सम्मान और साथ नहीं दे पाते जो सबसे जरूरी होता हैं।
रिश्तों के अभाव में भी बहुत से कर्तव्यों का निर्वहन होता हैं किसी के सदव्यवहार मृदु वाणी सकात्मक सोच वैचारिक मिलन व आकर्षक व्यक्तित्व से हम सहज ही आकर्षित होते हैं जिनसे खून के रिश्ते न होकर भी असीम अपनापन होता हैं कोई आपको समझने और फ़िक्र करने वाले हैं तो रिश्तों की दुनिया के आप सबसे कीमती व्यक्ति हैं जो हैं उन्हें संभालकर रखिए समय दीजिए आत्मीय संवाद बनाएं रखिए और दिल से निभाइए क्योंकी ऐसे रिश्ते हर किसी के पास नही होते खो जाने पर खयाल आता हैं कितना कीमती था वह समय व्यक्ति और संबंध।
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