संजय एम तराणेकर
(कवि, लेखक व समीक्षक)
इन्दौर, (मध्य प्रदेश)
गजल : संवरे जिंदगी…!
आप अपने ‘दुश्मन’ से कर लीजिए किनारा,
इश्क़ में इतना डूब जाइये मिलता हैं सहारा।
दुश्मनी को ‘वक़्त’ ना दिया करों मिलने का,
कहना ये समय हैं इश्क में बावला होने का।
इस दिल-ए-नादान को ‘चैन’ कहाँ हैं मिलता,
सुबह हो या शाम ये हरदिन धूप में खिलता।
ये इल्तिजा करता हूँ मुझे न रहने देना तनहा,
फिर न जाने कैसे कटेगी जिंदगी हर लमहा।
मैंने तेरी यादों को ‘संजो’ रखा अपने सीने से,
ये दुआँ करते हैं संवरे जिंदगी खून-पसीने से।







