रिश्तों में दूर करते व्यवधान…!

Spread the love

 

संजय एम तराणेकर

(कवि, लेखक व समीक्षक)

इन्दौर, (मध्य प्रदेश)

 

 

                                   (नया अध्याय, देहरादून)

 

        रिश्तों में दूर करते व्यवधान…!

 

ये एक परिवार या एक कोठी की नहीं कहानी, 

रिश्तों, दौलत व मानसिक तनाव हुआ बयानी।

देश के नामी नाम राजश्री-कमला आती पसंद,

इंडस्ट्री व आम लोगों को हिलाया रह गए दंग। 

 

घर के एक कमरे में फांसी पे लटकी हुई मिलीं,

वो आत्महत्या का कदम ही क्यों उठाके चलीं।

रिश्तों में प्यार एवं विश्वास; कमी का गहरा दर्द,

किसी रिश्ते में प्यार या भरोसे का न रहा अर्थ।

 

जिंदगी खत्म कर लेना नहीं यह कोई समाधान,

रिश्ते में रहते जीने के लिए दूर करते व्यवधान।

यूं लंबे समय तक भावनात्मक तनाव में ना रहें,

आओं करें दुआ सकारात्मक सभी रहें प्रेम बहें।

(संदर्भ-दीप्ति का सुसाइड केस)

  • Related Posts

    साथ-साथ चल सकते हैं आर्थिक विकास और वित्तीय अनुशासन

    Spread the love

    Spread the love  आशीष कुमार चौहान (एनएसई  प्रबंध निदेशक एवं सीईओ)                 (नया अध्याय, देहरादून)   भारत का बजट 2026-27 साथ-साथ चल सकते…

    स्मृतियों की राह में कविता.

    Spread the love

    Spread the love  राजकुमार कुम्भज जवाहरमार्ग, इन्दौर               (नया अध्याय, देहरादून) _____________________ स्मृतियों की राह में कविता. _____________________ कविता नहीं है राख का ढ़ेर …

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    साथ-साथ चल सकते हैं आर्थिक विकास और वित्तीय अनुशासन

    • By User
    • February 5, 2026
    • 2 views
    साथ-साथ चल सकते हैं आर्थिक विकास और वित्तीय अनुशासन

    स्मृतियों की राह में कविता.

    • By User
    • February 5, 2026
    • 11 views
    स्मृतियों की राह में कविता.

    आशाओं की छतरी

    • By User
    • February 5, 2026
    • 6 views
    आशाओं की छतरी

    थोड़ा सा इश्क में

    • By User
    • February 5, 2026
    • 6 views
    थोड़ा सा इश्क में

    वासंतिक छवि(दोहे)

    • By User
    • February 5, 2026
    • 12 views
    वासंतिक छवि(दोहे)

    अंजाम-ए- गुलिस्ताँ क्या होगा ?

    • By User
    • February 5, 2026
    • 5 views
    अंजाम-ए- गुलिस्ताँ क्या होगा ?