संजय एम तराणेकर
(कवि, लेखक व समीक्षक)
इन्दौर, (मध्य प्रदेश)
(नया अध्याय, देहरादून)
प्रसन्न रहना सुंदर गहना…!
कहें कान्हा अहंकार ही विनाश का कारण,
सरल व्यक्तित्व से जीतीए जीवनरूपी रण।
हमारे शरीर में ‘ईश्वर और आत्मा’ ही अमर,
मनुष्य को मिला ऐसा जीवन जैसे हो नहर।
गीता उपदेशों को अपने जीवन में अपनाएँ,
व्यक्ति को उन्नति मिलें सही दिशा कहलाएं।
एकमात्र ऐसा ग्रंथ जीने का तरीका सीखाएँ,
जीवन में धर्म-कर्म और प्रेम का पाठ पढ़ाएं।
व्यक्ति करें स्वयं अनुसरण श्रेष्ठ वो कहलाएँ,
अपने कर्तव्यों का करों पालन पंख फैलाएं।
सीखिएं प्रत्येक परिस्थितियों में प्रसन्न रहना,
इस जीवन का यहीं तो हैं सबसे सुंदर गहना।







