निःस्वार्थ व्यक्ति

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डॉक्टर रामबली मिश्र, वाराणसी।

 

      (नया अध्याय, देहरादून)

 

 

 

    निःस्वार्थ व्यक्ति

 

निःस्वारथ प्रिय भाव मनोरम।

अतिशय मोहक अतुलित उत्तम।।

निष्कामी मानव अति पावन।

बहुत लुभावन परम सुहावन।।

 

सबके हित का वह उपदेशक।

अति सुंदर सद्भाव निदेशक।।

सिर्फ कामना जन कल्याणी।

जग में विरले ऐसे प्राणी।।

 

सहज सरल कोमल चित निर्मल।

विमल धवल उज्ज्वल अति शीतल।।

पर -उपकारी भव्य मनोरथ।

बैठा सदैव प्रभु शिव के रथ।।

 

योग साधनारत अति हर्षित।

शुद्ध धारणा से अभिसिंचित।

सहज सुस्ज्जित स्नेह परायण।

हर प्राणी में सतनारायण।।

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