राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
छत्तीसगढ़।
(नया अध्याय, देहरादून)
अपराध, आतंक और अत्याचार
सड़कों पर दुर्घटनाओं के शिकार
कहां है? हमारे मानव अधिकार !
अपराध की छाया में डूबा शहर,
प्रदूषण की हवा में सांसें हैं रुकी,
चेहरे पर डर की काली रेखाएँ ,
हर महिला उत्पीड़न की शिकार,
कहां है हमारे मानव अधिकार!
बच्चों की हँसी मिट्टी में मिली,
कहाँ हैं वो वादे – इरादे
जो चुनाव के नाम पर लिखे?
कागज़ों पर स्याही से सजे हैं कानून
चिल्लाती हैं सड़कें अपरंपार,
कहां हैं? हमारे मानव अधिकार!
न्याय की तराजू , ताकत के हाथों में झुकी,
कहाँ हैं वो दीवारें, जो रक्षा का वादा करतीं?
हक़ीक़त में तो बस, ट्रेन हवाई अड्डों पर कतार,
कहां है ? हमारे मानव अधिकार !
इतना सब सहने के बाद भी
आदमी दिखता है गुले – गुलज़ार,
आँखों में पल रहा है, सपना पुराना उधार,
कहां है? हमारे मानव अधिकार !







