राजेंद्र रंजन गायकवाड़
(सेवा निवृत केन्द्रीय जेल अधीक्षक)
छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, देहरादून)
संस्मरण 22
पैरासोशल (Parasocial) क्या है?
पैरासोशल एक मनोवैज्ञानिक अवधारणा है, जो एकतरफा रिश्ते को दर्शाती है। इसमें कोई व्यक्ति किसी मशहूर हस्ती (सेलिब्रिटी), इन्फ्लुएंसर, टीवी कैरेक्टर, यूट्यूबर या फिक्शनल पर्सनैलिटी के साथ भावनात्मक जुड़ाव महसूस करता है, मानो वे दोस्त हों या करीबी रिश्ता हो। लेकिन वास्तव में यह रिश्ता एकतरफ से होता है दूसरा व्यक्ति (सेलिब्रिटी) आपको जानता तक नहीं होता। पैरासोशल को हिंदी में परासामाजिक (Para-social) कहा जाता है, जैसे परासामाजिक अंतःक्रिया या परासामाजिक संबंध जैसे आप किसी बॉलीवुड स्टार या यूट्यूबर को रोज़ फॉलो करते हैं, उनकी पर्सनल लाइफ के बारे में सोचते हैं, खुश होते हैं या दुखी, जैसे वे आपका दोस्त हों।
सोशल मीडिया पर लाइक, कमेंट या डीएम करना, लेकिन जवाब न मिलने पर भी लगना कि वे आपको जानते हैं। टीवी सीरियल के कैरेक्टर से इतना लगाव कि उनकी “शादी” या “मौत” पर रोना।
यह अवधारणा 1956 में डोनाल्ड हॉर्टन और रिचर्ड वोल ने दी थी, जब टीवी आम हो रहा था। अब सोशल मीडिया के कारण यह और बढ़ गया है – इंस्टाग्राम, टिकटॉक, यूट्यूब पर सेलिब्रिटीज़ पर्सनल बातें शेयर करते हैं, जिससे लगता है कि वे “दोस्त” जैसे हैं। इसके कई फायदे होते हैं जैसे अकेलापन कम करता है। प्रेरणा मिलती है। मनोरंजन और कनेक्शन का अहसास होना । लेकिन ज्यादा लगाव से रियल लाइफ रिलेशनशिप प्रभावित हो सकते हैं। सेलिब्रिटी की लाइफ से तुलना करके खुद को कम महसूस करना और कभी-कभी ऑब्सेसिव हो जाता है।
वर्तमान अध्ययन 2025 में कैम्ब्रिज डिक्शनरी ने “Parasocial” को वर्ड ऑफ द ईयर चुना, क्योंकि सोशल मीडिया और AI (जैसे चैटबॉट्स) के साथ ऐसे रिश्ते बहुत बढ़ गए हैं।
अंत में, कहूं तो पैरासोशल नॉर्मल है, मेरे हजारों दोस्त हैं, मेरी शुरू से कोशिश है,, कि किसी को इग्नोर नहीं। करता लेकिन संबंध बैलेंस बनाए रखता हूं– रियल लोगों से असली रिश्ते बनाएं रखने के लिए विगत 20 साल से सोशल मीडिया पर हूं,, आज तक मैने किसी का दिल नहीं दुखाया न ही किसी ने विचारधारा / लेखन का विरोध किया।







