राजेंद्र रंजन गायकवाड़
(सेवा निवृत केन्द्रीय जेल अधीक्षक)
छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, देहरादून)
संस्मरण 23
प्रेम और करुणा से सेवा करें
लगभग 10 साल की आयु से मुझे मुहल्ले में समिति में प्रत्येक रविवार आठ दस लड़के कहीं किसी के घर बैठते कुछ घर, समाज की चर्चा करते और अंत में एक एक गीत गाकर घर लौटते तो बहुत खुशी होती थी। फिर स्कूल में अपुन पहले क्लास कैप्टन और बाद में स्कूल कप्तान बना तो आत्म विश्वास बढ़ता ही गया।
अस्सी के दशक में बैंक सेवा फिर 1994 से 2022 तक जिला जेल से केंद्रीय जेल अधीक्षक पदोन्नत होकर सेवा निवृत्त हुआ। जेल के कैदियों को समझना और फिर उन्हें समझाना कठिन काम होता था। लेकिन बहुत हद तक सफल रहा। इसलिए आज जागरूकता सामुदायिक केंद्र (Awareness Community Centers) स्थापित करने की जरूरत है। जहाँ समुदाय के लोग एकत्रित होकर विभिन्न सामाजिक, स्वास्थ्य, पर्यावरणीय, शैक्षिक और अधिकार संबंधी मुद्दों पर जागरूकता प्राप्त कर सकें।
भारत में ये केंद्र अक्सर ग्रामीण या शहरी समुदायों में सामुदायिक विकास, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक सुधार के लिए काम करते हैं। ये आदर्श रूप से कैसे होने चाहिए, इस पर कुछ मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं।
समावेशी और पहुंचयोग्य (Inclusive and Accessible) सभी आयु वर्ग, लिंग, जाति, धर्म और आर्थिक स्थिति के लोगों के लिए खुला हो। विकलांगों के लिए रैंप, आसान प्रवेश और सुविधाएँ हों।स्थान समुदाय के केंद्र में हो, ताकि दूर-दराज के लोग भी आसानी से पहुँच सकें। बहुउद्देशीय सुविधाएँ (Multi-purpose)
बड़ा हॉल या कमरा जहाँ कार्यशालाएँ, सेमिनार, चर्चाएँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम हो सकें।लाइब्रेरी या पढ़ने का कोना, जहाँ जागरूकता संबंधी किताबें, पत्रिकाएँ और डिजिटल सामग्री उपलब्ध हो।
उपरोक्त के साथ साथ कंप्यूटर/इंटरनेट सुविधा (जैसे जन सेवा केंद्र या डिजिटल सेंटर की तरह) सरकारी योजनाओं, स्वास्थ्य जानकारी और ऑनलाइन शिक्षा के लिए आंगनवाड़ी या बच्चों के लिए खेल-शिक्षा क्षेत्र। जागरूकता कार्यक्रमों पर फोकस (Focus on Awareness Programs) नियमित गतिविधियाँ जैसे स्वास्थ्य शिविर, पर्यावरण जागरूकता, महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकार, स्वच्छता अभियान, वोटर जागरूकता आदि। लोकल मुद्दों पर आधारित: जैसे पोषण, परिवार नियोजन, नशा मुक्ति, आपदा प्रबंधन या डिजिटल साक्षरता। भागीदारी आधारित: समुदाय के लोग खुद कार्यक्रम चलाएँ, न कि केवल बाहर से विशेषज्ञ बुलाते रहें
स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण अनुकूल (Contextual and Sustainable) डिज़ाइन में स्थानीय सामग्री (जैसे मिट्टी, पत्थर) का उपयोग, ताकि पर्यावरण अनुकूल और कम खर्चीला हो। बाहरी स्थान जैसे उद्यान, आंगन या एम्फीथिएटर जहाँ त्योहार, नाटक या सामुदायिक बैठकें हो सकें। सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन जैसी टिकाऊ सुविधाएँ। प्रबंधन और भागीदारी (Management and Participation)
समुदाय द्वारा संचालित: पंचायत, एनजीओ या स्थानीय समिति का प्रबंधन करना प्रशिक्षित स्टाफ या स्वयंसेवक जो जागरूकता फैलाने में कुशल हों। सरकारी योजनाओं (जैसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जन औषधि केंद्र या राष्ट्रीय पोषण मिशन) से जुड़ाव।
भारत में कुछ उदाहरण नोखा गांव सामुदायिक केंद्र (राजस्थान) रेगिस्तानी क्षेत्र में बना, जहाँ कार्यशालाएँ और सामुदायिक आयोजन होते हैं। जेटवन केंद्र (महाराष्ट्र) बौद्ध समुदाय के लिए कौशल विकास और आध्यात्मिक जागरूकता। सामुदायिक रेडियो स्टेशन ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने का प्रभावी माध्यम। एनजीओ द्वारा चलाए केंद्र (जैसे कोलकाता के स्लम क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य जागरूकता केंद्र)।
ऐसे ही उद्देश्य को लेकर वर्ष 2007 में मेरी जीवन संगिनी सरोज जी ने #आदर्श समाज स्वप्न साकार संस्था बिलासपुर का पंजीयन कराकर विगत 18 वर्षों में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में समाज सेवा के काम को विस्तार दिया है। आगे भी हम सब समाज और देश की तरक्की के लिए अपने ज्ञान/ अनुभव के आधार पर काम करें तो हमारा जीवन सार्थक होगा।
प्रेम और करुणा के जनक प्रभु
ईशा मसीह के जन्म दिन की ढेर सारी शुभकामनाएं,,







