संजय एम तराणेकर
(कवि, लेखक व समीक्षक)
इन्दौर, (मध्य प्रदेश)
(नया अध्याय, देहरादून)
मकर संक्रांति पर विशेष कविता
पर्व की पावनता महान…!
मकर संक्रांति, लोहड़ी व पोंगल और बिहू,
उत्तरायण पर्व पावनता, सुख-समृद्धि देऊ।
उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम सभी स्थान,
भारतीय इसे श्रद्धा से मनाते करते हैं दान।
ऐसे पावन पर्व की पावनता होती हैं महान,
हल्दी-कुमकुम ‘परम्परा’ से रिश्ते की शान।
त्योहार पर्व शुभ शुरू हुआ सबका उत्थान,
लोहड़ी की आग में उत्साह जुड़े खान-पान।
संक्रांति से तिल गुड़ जुड़ा, करें प्रातः स्नान,
नव वस्त्र पहनकर पूजन विधि समान दान।
पोंगल-बिहू दक्षिण व उत्तर दिशा सुशोभित,
नवनृत्य ‘परिधान’ हर दिवस बनें सुलोहित।







