संजय एम तराणेकर
(कवि, लेखक व समीक्षक)
इन्दौर, (मध्य प्रदेश)
(नया अध्याय, देहरादून)
मुहब्बत को याद करते है…!
ये हम उनकी ही मुहब्बत को याद करते है,
हुई जो गलती उसे भूलने की बात करते हैं।
प्यार तो हम दिन-रात तुझे ही यार करते हैं,
आ जाओ फिर एक बार मुलाकात करते हैं!
जो आगे दूरियां निकटता की बात करते हैं।
ये हम उनकी ही मुहब्बत को याद करते है,
हुई जो गलती उसे भूलने की बात करते हैं।
यार तुम्हें ही मनाना है अपने घर वालों को,
हमें तो डंडे ना पड़े उसकी ही बात करते हैं!
धैर्य और साहस कैसे रखें वहीं बात करते हैं।
ये हम उनकी ही मुहब्बत को याद करते है,
हुई जो गलती उसे भूलने की बात करते हैं।
अब तो मेरे सब्र का बांध भी टूटा जा रहा है,
हम ही आपके अभिभावकों से बात करते हैं!
दे दो आपकी परी हम भी उसे प्यार करते हैं।
ये हम उनकी ही मुहब्बत को याद करते है,
हुई जो गलती उसे भूलने की बात करते हैं।
इतना साहस न था सिर्फ फरियाद करते हैं,
हमसे जो बन सकेगा हम वही बात करते हैं!
लाखों में एक है इसलिए हम मांग करते हैं।







