संजय एम तराणेकर
(कवि, लेखक व समीक्षक)
इन्दौर, (मध्य प्रदेश)
(नया अध्याय, देहरादून)
युवराज – क्यों? ठिठके कदम…!
सोच रहा हूँ क्यों? “ठीठके” हैं सबके कदम,
सैकड़ो लोग पुलिस-फायरकर्मियों का दम।
क्यों? नहीं बचा पाए एक युवराज की जान,
मॉल बनाने खोदे गहरे गड्ढे में निकले प्राण।
तमाशाईयों का हर डूबने वाले पे अफसोस,
अच्छा होता गर “बचाने” में लगा देते सोर्स।
कार के ऊपर खड़े शोर मचाते रहें युवराज,
अपने घर-परिवार का था इकलौता चिराग।
हे वतनपरस्तों मदद करने की कोशिश करों,
इंसानियत की ‘अहमियत’ को समझते रहों।
अपने घर के चिरागों को हमेशा रोशन करो,
कोई मौत के आगोश में न जाये ध्यान धरों।
(संदर्भ-इंजी.युवराज की गहरें गड्ढे में गिरने से मृत्यु)







