राजेंद्र रंजन गायकवाड़
(सेवा निवृत केन्द्रीय जेल अधीक्षक)
छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, देहरादून)
तुम्हारे साथ चल न सका,
ये सफ़र अधूरा ही रहा
दिल के किसी कोने में बस,
तेरा जिक्र जिंदा रहा
कभी हँसी की आहट थी,
कभी आँसुओं का सहारा रहा
हर लम्हा तेरे बिना अब
शरमाने लगा
रात की गोद में चाँद भी,
उदास-उदास सा रहा
कभी जो पास थे इतने,
अब ख्वाबों में आते हैं
हक़ीकत से दूर रहकर
रिश्ता कायम रहा
दुआ है बस यही अब,
जहाँ मिले न मिले
तेरी यादों का आलम,
हर हाल में बना रहा







