संजय एम. तराणेकर,
(कवि, लेखक व समीक्षक)
इन्दौर (मध्यप्रदेश)
(नया अध्याय, देहरादून)
चमक में खोता योगदान…!
वर्तमान में मिल रहा हैं काग़ज़ी सम्मान,
इससे चमक खोता वास्तविक योगदान।
आज ये राष्ट्र के आत्ममंथन का अवसर,
प्रशंसा-पत्रों को पाने के लिए सब तत्पर।
ये उत्कृष्ट कार्यों के सार्वजनिक स्वीकृति,
भले ही न मिले सबको इनकी प्रतिकृति।
निस्वार्थ भाव से राष्ट्र, समाज व व्यवस्था,
इनको बेहतर बनाने में योगदान अवस्था।
चयन पद्धतियों पर गंभीर प्रश्न ना हो खड़े,
राष्ट्रीय पर्व पे प्रशंसा-पत्रों के सम्मान बढ़े।
इनके लिए ना हो आवश्यक आवेदन देना,
सम्मान वहीं जो स्वतः मिले स्वीकार लेना।







