डॉक्टर रामबली मिश्र, वाराणसी
(नया अध्याय, देहरादून)
याद
जिससे प्यार अधिक होता है, उसकी याद अधिक आती है।
जिससे प्यार बहुत होता है, उसकी याद बहुत आती है।
जिससे दिल का अति लगाव हो, उसकी याद सदा आती है ।
सतत प्रीति रस जो टपकाता, उसकी याद सहज आती है।
जिसका हृदय सरस रस भावन, उसकी याद सरस आती है।
जो सहयोगी प्रेम परायण, उसकी याद स्वयं आती है।
जो मन में है सदा समाया, उसकी याद सिर्फ आती है।
उस पर ध्यान लगा हरदम है, जिसकी निर्मलता भाती है।
प्यार हमेशा सर्वोत्तम है, जिसकी याद जिला जाती है।







