डॉक्टर रामबली मिश्र, वाराणसी।
(नया अध्याय, देहरादून)
आशाओं की छतरी
आशाओं की छतरी ले कर।
चलते रहना आजीवन भर।।
आशा ही जीवन की नैया।
यही एक है सदा खेवैया।।
मत निराशमया जीवन जीना।
आशाओं की मदिरा पीना।।
आशाओं की शीतल छाया।
इससे सुखी सहज मन काया।।
आशा के ही दीप जलाना।
मन को मोहक तत्व खिलाना।।
कभी नहीं विचलित होना है।
कभी नहीं आपा खोना है।।
जो आशा को गले लगाता।
हँसी – खुशी से वह भर जाता।।
हो भविष्य उसका अति उज्ज्वल।
भाव – विचारों में निर्मल जल।।
डमरू पिरामिड (वर्णिक छंद)
स्नेहिल उर भाषा
प्रिय परिभाषा
जीवन आशा
मधुरिम
कोमल
नित
है
है
यही
परम
प्रियतर
अति मोहक
धर्म ग्रंथ सम
मधु पावन शुभ्रा
शुभांगी छंद
प्रभु! कृपा करो, वर हस्त धरो, प्रिय ज्ञान भरो, शिवशंकर।
करुणा सागर, सत्य प्रभाकर, ज्ञान सुधाकर, रामेश्वर।।
अमृत बोली, मधुमय टोली, रघुबर होली, प्रिय भोले।
संत मनोरथ, उत्तम सत पथ, शिव जी का रथ, नित डोले।।
भस्मासुर अरि, शिव त्रिपुरारी, संत सुरक्षा, शिव करते।
सदा पवित्रम, स्तुत्य शंकरम, मधुरम वचनम, दुख हरते।।
शुभ मन काया, करुणा दाया, उमापती की, जयकारा।
पावन आनन, शुभ मन आँगन, वैदिक वाचन, शिवधारा।।






