
ब्यूरो आगर मालवाः गोवर्धन कुम्भकार।
हिंदू नव वर्ष एवं चैत्र नवरात्र का प्रारंभ हुआ देवी मंदिरों मैं पूजा पाठ एवं अनुष्ठान किए जा रहे हैं।
कानड़ : गुड़ी पड़वा भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण त्योहार है गुड़ी पड़वा वसंत ऋतु का पर्व है,हिंदुओं के लिए नए साल का प्रतीक माना जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार यह चैत्र महीने के पहले दिन यानी नए साल की शुरुआत हो जाती, है हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल गुड़ी पड़वा ओर चैत्र नवरात्र का पर्व 30 मार्च को मनाया जा रहा । जो चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर रविवार को हिंदू नववर्ष गुड़ी पड़वा एवं चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व चैत्र मास के नक्षत्र अमृत सिद्धि सहित नव विक्रम संवत् 2082 की शुरुआत हो गई है चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर नगर में स्थित मां बिजासन माताजी एवं पचलाना रोड ठाकुर सेरी स्थित मां हिंगलाज देवी मठ में विराजित 51 शक्ति पीठ मां हिंगलाज देवी मंदिर में शुभ मुहूर्त में घट स्थापना की गई और पंच तत्व एवं देवी मां का अभिषेक किया गया और मां हिंगलाज देवी का अलौकिक श्रृंगार किया गया एवं देवी मां के दरबार में अखंड ज्योत प्रज्वलित की गई वही नगर के समीपस्थ ग्राम पचेटी मे स्थित जय माँ बाड़ी माता जी के यहां अपना काम करवाने के लिए पट्टा लेने के लिए माता के दर पर आता है माताजी पट्टा दे देती है और काम भी हो जाता है चैत्र नवरात्र ही नहीं इस मंदिर पर 12 महीने ही माता रानी के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ लगी रहती है के ओर वही ग्राम कलमोई में स्थित मां कमलेश्वरी माता जो सिंधिया राजघराने की कुलदेवी मानी जाती है कमलेश्वरी माताजी एक अपने आप में स्वरूप में विराजित है जो हर भक्त इस मंदिर में दर्शन के लिए आ जाता है मंदिर पर भी दर्शनार्थियों का ताता लगता रहेगा।