डिजिटल युग का डिजिटल युद्धक्षेत्र

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ब्यूरो मध्य प्रदेशः प्रेरणा गौतम (खबर बिज्जू)

 

 

     डिजिटल युग का डिजिटल युद्धक्षेत्र

 

 

आज का युग डिजिटल क्रांति का युग है, जहाँ सूचना और संचार की गति ने विश्व को एक वैश्विक गाँव में बदल दिया है। लेकिन इसी डिजिटल युग में एक नया युद्धक्षेत्र उभरा है जिसे आसान भाषा में सोशल मीडिया वॉर के नाम से जाना जाता है। यह पारंपरिक युद्ध से बेहद अलग है, क्योंकि इसमें हथियारों की जगह सूचना, प्रचार, और गलत सूचना का उपयोग होता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे X, फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, और टेलीग्राम इस युद्ध के प्रमुख हथियार बन गए हैं, जिनका उपयोग जनता की राय को प्रभावित करने, विरोधियों को बदनाम करने, और सामाजिक-राजनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए किया जाता है। आइए जानते है विस्तार से क्या है सोशल मीडिया वॉर और कैसे ये तबदील होता है युद्धक्षेत्र में ?

सोशल मीडिया वॉर एक डिजिटल युद्ध है, जिसमें सोशल मीडिया का उपयोग करके विचारधाराओं, प्रचार, या गलत सूचनाओं को फैलाया जाता है। इसका उद्देश्य जनता की राय को अपने पक्ष में करना, सामाजिक तनाव पैदा करना, या विरोधी पक्ष को कमजोर करना होता है। यह एक तरह का सूचना युद्ध है, जो मनोवैज्ञानिक और तकनीकी स्तर पर लड़ा जाता है।

जैसे विशिष्ट हैशटैग्स (#) के जरिए विचारों को वायरल करना,हैशटैग्स का उपयोग करके ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक अपने पोस्ट को पहुचा पाते है।

बॉट्स और ट्रोल्स से स्वचालित खाते (बॉट्स) और ट्रोल्स द्वारा प्रचार सामग्री को तेजी से फैलाने का काम काम करता है।

AI-जनरेटेड कंटेंट फर्जी वीडियो, तस्वीरें, या लेख बनाकर भ्रम पैदा करने वाला है।

सोशल मीडिया वॉर क्यों लड़ा जाता है?

सोशल मीडिया वॉर का उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है, जो सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, और सैन्य लक्ष्यों से जुड़े होते है और हो सकते हैं।

सबसे ज्यादा इसका प्रभाव आम जनता पर होता है, टेक्नोलॉजी के ज्ञान के अभाव जो ज्यादा लोगो को नही है जिसके कारण AI से बनाई गई फेक वीडियो और फ़ोटो को सच मान लेते है ? सोशल मीडिया आज लोगों की राय और विश्वास को आकार देने का सबसे शक्तिशाली माध्यम है। सरकारें, राजनीतिक दल, और संगठन इसका उपयोग जनता को अपने पक्ष में करने के लिए करते हैं, चुनावों से पहले सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाकर मतदाताओं को प्रभावित किया जाता है।प्रचार और छवि निर्माण किया जाता है ? देश, संगठन, या व्यक्ति अपनी छवि को बेहतर बनाने या विरोधियों को बदनाम करने के लिए प्रचार सामग्री का उपयोग करते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे पर दोनों पक्ष सोशल मीडिया पर अपने नैरेटिव को बढ़ावा देते हैं। 2019 के पुलवामा हमले के बाद, पाकिस्तान ने अपनी सेना की छवि को सकारात्मक दिखाने के लिए अभिनंदन वर्थमान के वीडियो का उपयोग किया, जबकि भारत ने #IndiaStrikesBack जैसे कैंपेन चलाए।

 

सोशल मीडिया सामाजिक आंदोलनों को गति देने या दबाने का एक प्रभावी साधन है। #MeToo जैसे आंदोलनों ने सोशल मीडिया के जरिए पूरे विश्व पर प्रभाव डाला था।

साइबर युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा की बात करे तो देश एक-दूसरे के खिलाफ प्रचार, गलत सूचना, और साइबर हमले करने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं। हाल ही में हुए जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले के बाद, पाकिस्तानी सोशल मीडिया यूजर्स ने #IndianFalseFlag और #PahalgamDramaExposed जैसे हैशटैग्स के साथ भारत को बदनाम करने की कोशिश की, जिसमें AI-जनरेटेड फर्जी वीडियो शामिल थे,और तो और भारत की ही एक कवित्री का वेडिओ को गलत तरह से भारत के खिलाफ फ़ैलाया गया ?

पाकिस्तान के आतंकी संगठनों का प्रचार सोशल मीडिया का उपयोग भर्ती, प्रचार, और समन्वय के लिए करता हैं। TTP जैसे संगठन टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर पत्रिकाएँ (जैसे ‘मुजल्ला तालिबान’) और प्रचार सामग्री फैलाते हैं।

 

सोशल मीडिया का उपयोग विरोधी पक्ष के मनोबल को तोड़ने, भय पैदा करने, या भ्रम फैलाने के लिए किया जाता है। फर्जी वीडियो या खबरें बनाकर किसी देश की सरकार को आसानी से अस्थिर दिखाया जा सकता है।

भारत और पाकिस्तान के बीच सोशल मीडिया वॉर स्पष्ट रूप में उदाहरण है। दोनों देश कश्मीर, आतंकवाद, और राष्ट्रीय छवि जैसे मुद्दों पर डिजिटल युद्ध लड़ रहे हैं । 2019 के पुलवामा हमले के बाद, पाकिस्तान के ISPR और साइबर समूहों ने भारत विरोधी प्रचार को बढ़ावा दिया था, जबकि भारत ने जवाबी कार्रवाई की थी। हाल के पहलगाम हमले के बाद, पाकिस्तानी यूजर्स ने फर्जी वीडियो और हैशटैग्स के साथ भारत को “false flag” हमले का दोषी ठहराया। भारत ने भी जवाब में पाकिस्तानी अकाउंट्स को ब्लॉक किया और अपने नैरेटिव को मजबूत किया।

सोशल मीडिया वॉर के प्रभाव

सोशल मीडिया वॉर के फायदे और नुकसान दोनों हैं। यह सस्ता, तेज, और व्यापक प्रभाव वाला है, लेकिन इसके नकारात्मक प्रभाव भी गंभीर हैं:

ध्रुवीकरण समाज में विभाजन और तनाव बढ़ता है। गलत सूचना, फर्जी खबरें और भ्रामक जानकारी से भ्रम फैलता है। जिससे विश्वास की कमी होती है सरकारों, संस्थानों, और मीडिया पर भरोसा कम हो जाता है।

सोशल मीडिया वॉर डिजिटल युग का एक शक्तिशाली हथियार है, जो सूचना और प्रचार के माध्यम से युद्ध के नए आयाम खोलता है। यह जनता को प्रभावित करने, छवि निर्माण, और रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने का एक प्रभावी साधन है। लेकिन इसके दुरुपयोग से सामाजिक एकता, विश्वास, और सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है। भारत-पाकिस्तान जैसे संदर्भों में यह युद्ध और भी जटिल हो जाता है, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़ा है। इस युद्ध को नियंत्रित करने के लिए जागरूकता, साइबर सुरक्षा, और जिम्मेदार सोशल मीडिया उपयोग जरूरी है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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